कोलकाता भगदड़ के बाद बंगाल सरकार का एक्शन, 3 दुर्गा पूजा पंडालों को फायर सेफ्टी नोटिस; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

कोलकाता | 19 अक्टूबर 2026

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने दक्षिण कोलकाता के तीन प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजकों को कथित सुरक्षा खामियों के संबंध में नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंडालों के निरीक्षण के दौरान अग्नि सुरक्षा, रोशनी, वेंटिलेशन और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी कमियां सामने आई थीं।

किन तीन दुर्गा पूजा समितियों को मिला नोटिस?

अधिकारियों के अनुसार, अग्निशमन विभाग ने जिन तीन पूजा समितियों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें शामिल हैं:

  • चेतला अग्रणी
  • बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन
  • त्रिधारा सम्मिलनी

यह कार्रवाई उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद की गई। घटना के बाद प्रशासन ने बड़े पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की जांच तेज कर दी है।

चोरबागान पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत

17 अक्टूबर की रात उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद पंडाल में प्रवेश और निकास की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा सुरक्षा कर्मियों की भूमिका पर सवाल उठे।

राज्य सरकार ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस भी हादसे की परिस्थितियों और संभावित लापरवाही की जांच कर रही है।

पंडालों के आसपास खतरनाक दुकानों को हटाने का निर्देश

अग्निशमन अधिकारियों ने पंडालों के आसपास बने अनधिकृत अस्थायी व्यावसायिक ढांचों और जोखिम पैदा करने वाले स्टॉल को हटाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने खास तौर पर ज्वलनशील सामग्री से बने अस्थायी ढांचों के पास एलपीजी सिलेंडर रखे होने को गंभीर अग्नि जोखिम बताया।

ऐसी व्यवस्था आग लगने की स्थिति में खतरा बढ़ा सकती है और आपातकाल के दौरान लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में बाधा पैदा कर सकती है। इसलिए पंडालों के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है।

रोशनी और वेंटिलेशन सुधारने पर जोर

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पंडालों के भीतर पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अंधेरे हिस्सों को खत्म किया जा सके और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, हवा के उचित आवागमन के लिए पर्याप्त पंखे और एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया।

प्रशासन का उद्देश्य भीड़भाड़ और घुटन जैसी परिस्थितियों से बचना तथा आपातकाल में लोगों को बाहर निकलने के लिए स्पष्ट रास्ते उपलब्ध कराना है। प्रवेश और निकास मार्गों पर दुकानों या अन्य अस्थायी ढांचों से रुकावट नहीं होनी चाहिए।

त्रिधारा सम्मिलनी समिति ने दिया अपना पक्ष

त्रिधारा सम्मिलनी के वरिष्ठ पदाधिकारी देबाशीष कुमार ने बताया कि पंडाल के उद्घाटन से पहले अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किया गया था। उनके अनुसार, पंडाल में अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया था और प्रवेश द्वार तथा रास्तों पर रोशनी की व्यवस्था थी।

उन्होंने यह भी कहा कि समिति ने सुरक्षा इंतजामों के संबंध में विभाग को अनुपालन रिपोर्ट सौंपी है। उनके मुताबिक, हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही को कोलकाता पुलिस, नागरिक सुरक्षा अधिकारियों और नगर निकाय के साथ समन्वय करके संभाला जा रहा है।

बालीगंज पंडाल को भी सुधार के निर्देश

अधिकारियों के अनुसार, बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन को पंडाल के भीतर रोशनी बेहतर करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि व्यावसायिक गतिविधियों के कारण प्रवेश तथा निकास मार्ग बाधित न हों।

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ की आवाजाही, आपातकालीन निकास और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए आयोजक और संबंधित विभाग मिलकर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखें।

बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज

कोलकाता की घटना ने धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा के महत्व को फिर सामने ला दिया है। ऐसे आयोजनों में पर्याप्त निकास द्वार, स्पष्ट रास्ते, रोशनी, अग्निशमन उपकरण और प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है।

तीन पूजा समितियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब संबंधित आयोजनों में सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चोरबागान हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और जिम्मेदारी किन लोगों की बनती है।

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