MP में आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने पर बवाल, शिवराज के विरोध के बाद CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

भोपाल | 13 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के घर गिराए जाने और फसलों को नुकसान पहुंचने के आरोप सामने आए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई पर नाराजगी जताई और प्रभावित परिवारों के साथ धरने पर बैठ गए। मामले के बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए हैं और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है।

यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर आदिवासी परिवारों के आवास, जमीन पर उनके दावों और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है। एक ओर वन विकास निगम का कहना है कि कार्रवाई वन भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए की गई, वहीं प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं।

कोसमी गांव में 12 परिवारों के घर गिराए जाने का मामला

सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घरों को गिराया गया। इस घटना में घरों के साथ फसलों को नुकसान पहुंचने और एक कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

स्थानीय परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे और खेती के जरिए अपना जीवनयापन करते थे। घर टूटने के बाद उनके सामने रहने और आजीविका की समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने पुराने निवास और जमीन से जुड़े दस्तावेजों का हवाला दिया है।

दूसरी ओर, वन विभाग और वन विकास निगम की ओर से इसे वन भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताया गया है। जमीन के स्वामित्व, कब्जे की अवधि और परिवारों के दावों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर जताई नाराजगी

घटना की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कोसमी गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनके घरों तथा फसलों को हुए नुकसान पर नाराजगी जताई। चौहान ने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों की परेशानी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि जिन आदिवासी परिवारों ने चुनावों में भाजपा का समर्थन किया, उन्हें इस तरह की कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ा। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अधिकारियों की कार्रवाई से राज्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

चौहान प्रभावित परिवारों के साथ धरने पर भी बैठे। उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को राहत दिलाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों के नुकसान और उनकी परिस्थितियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

मामले पर बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और उन्होंने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई से जुड़ी परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाएगा।

सरकार की जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि घरों को गिराने से पहले कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई, संबंधित परिवारों को क्या नोटिस दिए गए थे, उनके पास जमीन से जुड़े कौन-से दस्तावेज हैं और कार्रवाई किन आदेशों के आधार पर की गई।

जांच से यह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। प्रभावित परिवारों को राहत देने और नुकसान का आकलन करने का सवाल भी इस मामले में महत्वपूर्ण बना हुआ है।

वन विकास निगम ने क्या बताया?

वन विकास निगम के अनुसार, संबंधित जमीन आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। निगम का दावा है कि वर्ष 2021 में वन विभाग से जमीन पौधारोपण के लिए मिलने के बाद वहां वृक्षारोपण किया गया था। इसके बाद कुछ लोगों द्वारा जमीन पर अतिक्रमण करने और पौधों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें सामने आईं।

निगम की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित लोगों को बेदखली के नोटिस दिए गए थे और वन अपराध से जुड़े मामले दर्ज किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य वन भूमि से कथित अतिक्रमण हटाना था।

हालांकि, प्रभावित परिवारों ने जमीन पर लंबे समय से रहने का दावा किया है। कुछ परिवारों ने पुराने पट्टे और रसीदें होने की बात भी कही है। इन दस्तावेजों की वैधता, जमीन की स्थिति और कब्जे से जुड़े विवाद का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मांगा जवाब

मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सीहोर जिले के संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।

आयोग ने अधिकारियों से निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। यदि तय समय में जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया जा सकता है।

आयोग की दखल के बाद अब मामले में प्रशासनिक जांच के साथ-साथ आदिवासी परिवारों के अधिकारों और कार्रवाई की वैधता पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है।

विपक्ष ने भी सरकार पर उठाए सवाल

घटना को लेकर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि आदिवासी परिवारों को घरों से बेदखल किए जाने के मामले में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

विपक्ष ने सवाल उठाया है कि यदि परिवार लंबे समय से उस जमीन पर रह रहे थे, तो उनके दावों और पुनर्वास की व्यवस्था पर पहले विचार क्यों नहीं किया गया। दूसरी ओर, वन विभाग की ओर से कार्रवाई को अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बताया गया है।

इस विवाद के बीच सरकार के सामने चुनौती है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और जमीन से जुड़े दस्तावेजों, नोटिस तथा कार्रवाई की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाए। प्रभावित परिवारों के आवास और आजीविका पर पड़े असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें

कोसमी गांव का मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने और मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अगला कदम जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।

जांच में यदि प्रक्रिया संबंधी अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, यदि वन भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े दावे सही पाए जाते हैं, तब भी प्रभावित परिवारों के कानूनी अधिकारों और उपलब्ध राहत विकल्पों का परीक्षण जरूरी होगा।

फिलहाल, प्रभावित परिवारों के दावों और वन विकास निगम के पक्ष के बीच स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और आगे सरकार क्या कदम उठाती है।

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