भिवंडी | 17 अक्टूबर 2026
एक्सपायरी खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय दोबारा बाजार में बेचने के कथित मामले ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र के भिवंडी में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की शिकायत के बाद एक ई-कॉमर्स कंपनी के वेयरहाउस मैनेजर और एक स्थानीय व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि एक्सपायरी फूड स्टॉक को नष्ट दिखाने के लिए फर्जी डिस्पोजल प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया और सामान को दोबारा बिक्री के लिए बाजार में भेजा गया।
नष्ट किए जाने वाले स्टॉक को दोबारा बेचने का आरोप
जांच से जुड़े समाचारों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भिवंडी स्थित एक वेयरहाउस में एक्सपायरी खाद्य पदार्थों के स्टॉक के बारे में जानकारी मिली थी। आरोप है कि रिकॉर्ड में सामान को नष्ट किया हुआ दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में उसे बाजार में वापस भेजने की कोशिश की गई।
इस मामले में कोंगांव पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर इस प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और खाद्य उत्पादों को दोबारा बिक्री के लिए कैसे भेजा गया।
करीब 1.5 टन एक्सपायरी खाद्य पदार्थ जब्त
25 जून 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भिवंडी के एक अमेजन रिटेल वेयरहाउस से लगभग 1.5 टन एक्सपायरी खाद्य उत्पाद जब्त किए थे। इस कार्रवाई के बाद कंपनी के एक अधिकारी और एक व्यापारी के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस कार्रवाई के साथ बताए जा रहे ₹33.71 करोड़ के कुल स्टॉक मूल्य की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस राशि को जांच से संबंधित दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फर्जी डिस्पोजल प्रमाणपत्रों की भी जांच
खाद्य पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि स्टॉक के निस्तारण से संबंधित प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी कर खाद्य उत्पादों को दोबारा बाजार तक पहुंचाया गया। पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि दस्तावेज किसने तैयार किए और कथित रूप से इस प्रक्रिया से किसे लाभ मिला।
लोगों की सेहत के लिए क्यों गंभीर है मामला?
एक्सपायरी खाद्य पदार्थों को दोबारा बेचने से उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा पैदा हो सकता है। उत्पाद की प्रकृति, भंडारण की स्थिति और उसकी वास्तविक समय-सीमा के आधार पर उसके खराब होने या दूषित होने का जोखिम अलग-अलग हो सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों को नियमों के अनुसार नष्ट करना और उनके निस्तारण का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएंगे आगे के तथ्य
फिलहाल, मामला एफआईआर और जांच से जुड़ा है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कितने उत्पाद दोबारा बिक्री के लिए भेजे गए और कथित गतिविधि से कितने उपभोक्ता प्रभावित हो सकते थे।
