आज से शुरू गुप्त नवरात्रि, किन बातों से रखें परहेज, जानिए पूरी विधि

नवरात्रि का नाम सुनते ही व्रत, पूजा और देवी मां की भक्ति की तस्वीर सामने आ जाती है. साल में चार बार नवरात्रि होती है. लेकिन आमतौर पर लोग केवल चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं. इसके अलावा दो नवरात्रि ऐसी भी होती हैं. जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. गुप्त नवरात्रि को रहस्यमयी नवरात्रि भी कहा जाता है. क्योंकि इस दौरान की जाने वाली साधना को सार्वजनिक नहीं किया जाता. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में की गई साधना का फल लंबे समय तक मिलता है.
अगर आप भी गुप्त नवरात्रि में साधना करना चाहते हैं. तो इसके लिए विधि और नियम जानना बेहद जरूरी है. विंध्यधाम के प्रसिद्ध आचार्य पं. अनुपम महाराज ने गुप्त नवरात्रि की साधना से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है.

गुप्त नवरात्रि का महत्व
विंध्यधाम के पं. अनुपम महाराज बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि को रहस्यमयी इसलिए कहा जाता है. क्योंकि इसमें साधक अपनी साधना को सार्वजनिक नहीं करता. इस नवरात्रि में मां भगवती की गुप्त आराधना होती है. साथ ही 10 महाविद्या, मां दुर्गा और भैरव सहित अन्य देवी-देवताओं की विशेष साधना की जाती है.
गुप्त नवरात्रि की साधना घर, मंदिर या किसी योग्य आचार्य और पुरोहित के माध्यम से संकल्प लेकर की जा सकती है. इसमें दुर्गा सप्तशती का पाठ, नवाक्षरी मंत्र का जाप, देवी भागवत का पाठ, रुद्र चंडी, शतचंडी और सहस्त्रचंडी जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में किया गया अनुष्ठान अत्यंत शक्तिशाली होता है. और जल्दी फल देता है.

गुप्त नवरात्रि पर साधना का सर्वोत्तम समय
पं. अनुपम महाराज के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में साधना का सबसे उत्तम समय रात्रि का होता है. साधक किसी एकांत स्थान या मंदिर में बैठकर पाठ और जाप कर सकता है. एकाग्रता और नियमों के साथ की गई साधना से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

गुप्त नवरात्रि पर पूजन और पाठ कैसे करें
अगर आप मंदिर नहीं जा सकते हैं. तो घर पर ही गुप्त नवरात्रि की साधना कर सकते हैं. इसके लिए घी की अखंड ज्योति जलाएं. अगर घी उपलब्ध न हो. तो तिल के तेल का दीपक भी जला सकते हैं.
घर में मां का कलश स्थापित करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. गुप्त नवरात्रि आज से शुरू होकर 28 तारीख को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी. इन 9 दिनों में प्रतिदिन नवदुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है.
अंत में कन्या पूजन करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें. विशेष रूप से सुहाग से जुड़ा सामान दान करना शुभ माना जाता है. 9 दिनों में कम से कम एक दिन किसी देवी मंदिर के दर्शन जरूर करें. या आचार्य के माध्यम से मां का श्रृंगार कराएं. इससे जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.