विध्वंस के 1000 वर्ष बाद सोमनाथ में भव्य महाशिवरात्रि

10 फरवरी 2026

5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन अलर्ट

सोमनाथ (गुजरात)।
भारत की आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक सोमनाथ मंदिर में इस वर्ष की महाशिवरात्रि ऐतिहासिक और भव्य होने जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए आने की संभावना है। खास बात यह है कि यह आयोजन उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हो रहा है, जब सोमनाथ मंदिर के विध्वंस को लगभग 1000 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और इसके बाद पुनर्निर्माण तथा पुनर्जागरण की यात्रा आज भी श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ रही है।

स्वाभिमान पर्व के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

पिछले महीने आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बाद से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। इस पर्व ने न सिर्फ धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सोमनाथ के ऐतिहासिक महत्व को भी देशभर में नई पहचान दिलाई। इसका सीधा असर महाशिवरात्रि के आयोजन पर देखने को मिल रहा है।

महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में

रुद्राभिषेक,

महामृत्युंजय जाप,

विशेष आरती
और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से लेकर देर रात तक भगवान सोमनाथ के दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इस दिन शिवलिंग पर विशेष वैदिक विधि से जल, दूध, बेलपत्र और भस्म अर्पित की जाएगी।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी

इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए

कड़े सुरक्षा इंतजाम,

अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती,

सीसीटीवी निगरानी,

ड्रोन सर्विलांस
की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा,

ट्रैफिक मैनेजमेंट,

मेडिकल कैंप,

एंबुलेंस सेवाएं,

पेयजल और शौचालय
जैसी सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है।

श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष फोकस

मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में

दर्शन कतारों का विस्तार,

वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग व्यवस्था,

स्वयंसेवकों की तैनाती
की गई है ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

सोमनाथ: आस्था और संघर्ष का प्रतीक

सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। इतिहास में कई बार विध्वंस झेलने के बावजूद, इसका पुनर्निर्माण भारतीय संस्कृति की अडिग आस्था और आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुका है। आज, विध्वंस के लगभग 1000 वर्ष बाद, जब यहां लाखों श्रद्धालु एकत्र हो रहे हैं, यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उत्सव भी है।

प्रशासन की अपील

मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से

अनुशासन बनाए रखने,

सुरक्षा निर्देशों का पालन करने,

निर्धारित मार्गों का उपयोग करने
की अपील की है।

निष्कर्ष

महाशिवरात्रि के अवसर पर सोमनाथ मंदिर एक बार फिर आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक गौरव का संगम बनने जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि सोमनाथ न सिर्फ एक मंदिर है, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक भी है। सौभाग्य की प्राप्ति होती है.