महाराष्ट्र सरकार ने ‘धर्म परिवर्तन विरोधी’ विधेयक पारित किया, जबरन धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान

23 मार्च 2026

महाराष्ट्र विधानसभा ने फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल, 2026 (धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम) पारित कर दिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र ऐसा करने वाला भारत का 13वां राज्य बन गया है, जहां धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून लाया गया है। अब यह विधेयक लागू होने के लिए राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि यह कानून जबरन, धोखे या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए जरूरी है। वहीं विपक्षी दलों, ईसाई संगठनों और कई नागरिक समाज समूहों ने इस कानून को लेकर चिंता जताई है।

क्या है विधेयक का उद्देश्य

गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना है।

उन्होंने बताया कि यह कानून उन मामलों को रोकने के लिए बनाया गया है, जिनमें किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन जबरदस्ती, धोखाधड़ी, धमकी, लालच या विवाह के माध्यम से कराया जाता है।

विधेयक में ‘लालच’ की परिभाषा भी व्यापक रखी गई है, जिसमें पैसे, उपहार, नौकरी, मुफ्त शिक्षा या विवाह के प्रस्ताव देकर धर्म परिवर्तन कराने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

इसके अलावा विधेयक में शिक्षा के माध्यम से ‘ब्रेनवॉश’ करके धर्म परिवर्तन कराने या किसी धर्म को श्रेष्ठ या निम्न बताकर लोगों को प्रभावित करने को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

कानून के अनुसार धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को पहले जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद 21 दिनों के भीतर इसकी आधिकारिक जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर धर्म परिवर्तन को अमान्य माना जा सकता है।

कड़े दंड का प्रावधान

प्रस्तावित कानून में अवैध धर्म परिवर्तन के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है।

यदि धर्म परिवर्तन विवाह से जुड़ा हुआ पाया जाता है, तो दोषी को 7 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

अगर धर्म परिवर्तन किसी नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य से जुड़ा हो, तो सजा 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकती है।

सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों को 10 साल तक की जेल हो सकती है।

विरोध और चिंता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि यह विधेयक किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाता और स्वेच्छा से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर कोई रोक नहीं लगाता।

हालांकि विपक्षी दलों और कई अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि कानून की कुछ धाराएं अस्पष्ट हैं, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और व्यक्तिगत पसंद के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

कई सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि इससे वैध सामाजिक, शैक्षिक और धार्मिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

11 मार्च को भारत के 35 नागरिक समाज संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर इस विधेयक का विरोध भी किया था।

निष्कर्ष:
महाराष्ट्र सरकार द्वारा पारित फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026 का उद्देश्य जबरन, धोखे या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना बताया गया है। हालांकि इस कानून को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच बहस जारी है। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही पूरी तरह लागू हो सकेगा।