लखनऊ | 11 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में दिए एक बयान से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का सपना देख रहे हैं, उनका यह सपना कयामत तक भी पूरा नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि जो कानून तोड़ेगा, उसे वह खुद जहन्नुम का रास्ता दिखा देंगे। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
दरअसल, यह टिप्पणी हाल ही में मौलाना जर्जिस अंसारी के बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अयोध्या में जहां राम मंदिर बना है, वहां कयामत तक बाबरी मस्जिद ही रहेगी। इसी संदर्भ में योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी की सभा में यह प्रतिक्रिया दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का बयान सीधे तौर पर उस टिप्पणी का जवाब था और इसे वैचारिक तथा राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया और कहा कि प्रदेश में किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक उकसावे, भड़काऊ बयान या सामाजिक तनाव फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उनका यह संदेश कानून व्यवस्था को लेकर सख्ती दिखाने के रूप में देखा जा रहा है।
इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कुछ नेताओं ने इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बताया, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि उनका बयान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के संदर्भ में था। अयोध्या और बाबरी मस्जिद से जुड़ा मुद्दा लंबे समय से देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक और राजनीतिक विषयों में रहा है, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भले ही विवाद कानूनी रूप से समाप्त माना जाता हो, लेकिन राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर यह अब भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

