02 मार्च 2026
मध्य-पूर्व में जारी ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर दक्षिण एशिया तक दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर रविवार को हिंसक प्रदर्शन के दौरान 23 लोगों की मौत और 10 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है। प्रदर्शन अली खामेनेई की मौत की खबरों के विरोध में किया गया था। भीड़ द्वारा परिसर में घुसने की कोशिश के बाद दूतावास के भीतर से गोलीबारी हुई, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।
भारत में भी विरोध प्रदर्शन, कश्मीर में कड़ी सुरक्षा
इस घटनाक्रम का असर भारत में भी देखने को मिला। शिया समुदाय के कुछ समूहों ने कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जम्मू और कश्मीर के कई जिलों में कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं। राजधानी श्रीनगर के प्रमुख बाजार क्षेत्र लाल चौक में बैरिकेडिंग कर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और एहतियातन इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की गईं।
दिल्ली में हाई-लेवल सुरक्षा बैठक
क्षेत्रीय हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर रविवार रात सुरक्षा मामलों की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आपात स्थिति में निकासी योजना था।
विदेश नीति स्तर पर सक्रिय कूटनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने हालात को लेकर मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। सूत्रों के अनुसार बातचीत में क्षेत्रीय स्थिरता, नागरिक सुरक्षा और संघर्ष कम करने के उपायों पर चर्चा हुई।
एयरस्पेस बंद, वैश्विक चिंता बढ़ी
लगातार दो दिन से जारी सैन्य गतिविधियों के कारण पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपना एयरस्पेस आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और हजारों यात्री फंसे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष: ईरान-इजराइल टकराव अब क्षेत्रीय संकट का रूप लेता दिख रहा है, जिसके प्रभाव पाकिस्तान से लेकर भारत तक महसूस किए जा रहे हैं। कूटनीतिक प्रयास तेज हैं, लेकिन हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।

