NCERT की ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली किताब पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, हार्ड-डिजिटल कॉपी हटाने का आदेश

नई दिल्ली | 27 फरवरी 2026

देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 8वीं कक्षा की सोशल साइंस पुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक अध्याय पर कड़ा रुख अपनाते हुए किताब की छपाई, बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जो प्रतियां पहले ही छप चुकी हैं उन्हें जब्त किया जाए और उनकी डिजिटल कॉपियां भी सभी प्लेटफॉर्म से हटाई जाएं।

यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि पाठ्यपुस्तक की सामग्री न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतीत होती है और यह “गहरी व सोची-समझी साजिश” जैसा मामला लग सकता है। अदालत ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच होगी और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

NCERT और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस

पीठ ने NCERT के निदेशक और केंद्रीय शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि वे पाठ्यक्रम निर्धारण से जुड़ी बैठकों का रिकॉर्ड, अध्याय तैयार करने वाले लेखकों के नाम, उनकी शैक्षणिक योग्यता और चयन प्रक्रिया का पूरा विवरण प्रस्तुत करें। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।

सरकार की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और उसका अपमान करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विवादित अध्याय तैयार करने की प्रक्रिया में जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मामले की संवेदनशीलता

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री अत्यंत सावधानी से शामिल की जानी चाहिए, क्योंकि यह छात्रों की संस्थाओं के प्रति धारणा को प्रभावित करती है। अदालत के सख्त रुख से संकेत मिलता है कि शिक्षा सामग्री की समीक्षा और प्रकाशन प्रक्रिया अब और कठोर निगरानी में आ सकती है।यह मामला फिलहाल जांच और जवाबों के चरण में है, लेकिन शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।