स्थान: अयोध्या
दिनांक: 2 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, अयोध्या:
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए करोड़ों रुपये के कथित चढ़ावा और चंदा चोरी कांड (Donation Embezzlement Row) के बाद धर्मनगरी अयोध्या में प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश में हर दिन होने वाले चौंकाने वाले खुलासों के बीच, अब उत्तर प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन ने गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) और जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, जेल में बंद आरोपियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों और बिना नक्शा पास कराए बनाए गए मकानों को चिन्हित कर लिया गया है और बहुत जल्द उन पर बुलडोजर (Demolition Drive) चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बीच, राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी भी आमने-सामने आ गए हैं, जिससे अंदरूनी कलह पूरी तरह सतह पर आ गई है।
“गोपाल राव ने बिगाड़ी व्यवस्था, वे राजनीति कर रहे हैं”— महंत दिनेंद्र दास
एसआईटी जांच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास महाराज ने एक बेहद तीखा और विस्फोटक बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस पूरे वित्तीय महा-घोटाले और अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर मंदिर के अनौपचारिक व्यवस्थापक और विहप (VHP) के केंद्रीय सह-मंत्री गोपाल राव को जिम्मेदार ठहराया।
महंत दिनेंद्र दास ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा:
“राम मंदिर परिसर की तमाम व्यवस्थाएं गोपाल राव के आने के बाद ही पूरी तरह बिगड़ी हैं। गोपाल राव हर छोटी-बड़ी बात को पेचीदा बना देते हैं और सबको परेशान करते हैं। उत्तर प्रदेश में हमारे जितने भी ट्रस्टी हैं, वे भगवान राम की पवित्र परंपरा और मर्यादा को मानते हैं, जबकि गोपाल राव उस राम परंपरा पर विश्वास ही नहीं करते। वे केवल यहां अपनी राजनीति चमका रहे हैं और इस पूरे विवाद के पीछे उन्हीं की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं।”
गौरतलब है कि कर्नाटक के पूर्व प्रांत प्रचारक रहे गोपाल राव से एसआईटी की टीम दो बार गहन पूछताछ कर चुकी है। हालांकि, वे लगातार इन आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
गोबर के उपलों में मिले थे ₹10 लाख; 8 आरोपी जेल में
एसआईटी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच में इस घोटाले की जो परतें खुली हैं, उसने पूरे देश के रामभक्तों को झकझोर कर रख दिया है।
- महीनों का सीसीटीवी फुटेज डिलीट: जांच में सामने आया है कि कैश काउंटिंग रूम के लगभग आठ महीने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से जानबूझकर छेड़छाड़ की गई और उसे डिलीट कर दिया गया।
- उपलों में छिपाया कैश: सबसे सनसनीखेज बरामदगी आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से हुई थी, जहां पुलिस ने गोबर के उपलों (कंडों) के बीच छिपाकर रखे गए 10 लाख रुपये नकद बरामद किए थे।
- बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला: मामले की गंभीरता और धार्मिक आस्था को देखते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है कि अयोध्या का कोई भी स्थानीय वकील इन आठों आरोपियों की तरफ से अदालत में पैरवी (केस) नहीं लड़ेगा।
आरोपियों की सूची और वर्तमान प्रशासनिक एक्शन की स्थिति
| गिरफ्तार मुख्य आरोपी (नकद गणना टीम) | प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्टेटस |
| लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा | 3 दिन की पुलिस रिमांड के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल। |
| मनीष कुमार, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा | संपत्तियों की जांच जारी, बैंक खाते पूरी तरह फ्रीज किए गए। |
| सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर उर्फ टिंकू यादव | अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए प्रशासन द्वारा 48 घंटे का नोटिस जारी। |
| ट्रस्ट के बड़े चेहरों पर गाज | महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। |
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह विभाग और एसआईटी के शीर्ष अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस आस्था के केंद्र में सेंध लगाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन अब प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत इन आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने की वैधानिक रूपरेखा तैयार कर रहा है, और इसी हफ्ते अयोध्या के विभिन्न इलाकों में आरोपियों के अवैध ठिकानों पर बुलडोजर की गूंज सुनाई दे सकती है।
