नई दिल्ली | 3 नवंबर 2026
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 331 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। हवा में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि राजधानी के आठ इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह दिल्ली का AQI 307 था, जो मंगलवार सुबह बढ़कर 331 हो गया। इससे साफ है कि राजधानी में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।
जहांगीरपुरी में AQI 449, कई इलाकों में हालात गंभीर
दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक दर्ज किया गया। जहांगीरपुरी में AQI 449 रहा, जबकि रोहिणी में 429 और पंजाबी बाग में 424 दर्ज किया गया।
इसके अलावा अलीपुर में 413, विवेक विहार में 410, बवाना में 408, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी क्षेत्र में 407 और नरेला में 406 AQI रिकॉर्ड किया गया।
दिल्ली के 58 निगरानी केंद्रों में से 57 पर AQI 200 से अधिक रहा। वहीं, 41 केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर 300 के पार दर्ज किया गया।
GRAP-2 लागू, प्रदूषण रोकने के लिए बढ़ेंगी पाबंदियां
दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद CAQM ने GRAP के दूसरे चरण को लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे।
- सड़कों की मैकेनिकल और वैक्यूम स्वीपिंग बढ़ाई जाएगी।
- सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल बढ़ेगा।
- अधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के उपाय तेज होंगे।
- निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
- सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत किया जाएगा।
- डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
PM2.5 बना प्रदूषण की बड़ी वजह
CPCB के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अधिकांश निगरानी केंद्रों पर PM2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया। PM2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं।
वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी प्रदूषित हवा को फैलने से रोक सकती हैं।
नोएडा और गुरुग्राम में भी बिगड़ी हवा
प्रदूषण का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। मंगलवार सुबह नोएडा में AQI 307 और मानेसर में 302 दर्ज किया गया। गुरुग्राम में यह 284, गाजियाबाद में 259 और ग्रेटर नोएडा में 213 रहा।
इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के साथ आसपास के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत खराब और गंभीर श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रदूषण बढ़ने के दौरान लोगों को खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचना चाहिए और जरूरत के अनुसार बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करना चाहिए।
साफ हवा के लिए जरूरी हैं सामूहिक प्रयास
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण हर साल सर्दियों के दौरान गंभीर चुनौती बन जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए केवल अस्थायी प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन, कचरा जलाने पर रोक और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग जरूरी है।
राजधानी की बिगड़ती हवा एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल सर्दियों में लागू करने के बजाय पूरे साल प्रभावी तरीके से अपनाए जा रहे हैं।
