कूनो में चीते की मौत के बाद सरकार का बड़ा एक्शन, 6 वनकर्मी निलंबित; दो संदिग्ध गिरफ्तार, STF कर रही जांच

श्योपुर/मुरैना, मध्य प्रदेश | 31 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से जुड़े वन क्षेत्र में 19 महीने के चीते KNG22 की गोली लगने से हुई मौत के मामले में राज्य सरकार और वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में लापरवाही के आरोप में श्योपुर और मुरैना वन मंडल के छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मुरैना पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले ही विशेष जांच दल (STF) का गठन किया था। केंद्र सरकार ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम भेजी है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि चीता भारत में 2022 में दोबारा बसाए जाने के बाद गोली लगने से हुई मौत की पहली बड़ी घटना के रूप में सामने आया है। इस घटना ने प्रोजेक्ट चीता के तहत वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

19 महीने के चीते के शरीर से निकले थे पांच छर्रे

मृत चीता KNG22 मादा चीता निर्वा की संतानों में से एक था। जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को यह चीता मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र के जंगल में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। बाद में उसे उपचार के लिए कूनो नेशनल पार्क लाया गया और बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया।

चिकित्सकीय जांच और सीटी स्कैन में उसके शरीर के अंदर कई धातु के छर्रे पाए गए। आपातकालीन सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले। हालांकि, गंभीर चोटों और आंतरिक अंगों को हुए नुकसान के कारण 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।

दो रेंजर समेत छह वनकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज

चीते की सुरक्षा और निगरानी में कथित लापरवाही को देखते हुए वन विभाग ने छह कर्मचारियों को निलंबित किया है। इनमें दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षक शामिल हैं।

निलंबित कर्मचारियों में मुरैना के पहाड़गढ़ क्षेत्र के रेंजर आकाश तोमर, कन्हार चौकी के डिप्टी रेंजर कीर्ति शांडिल्य और दिनेश मरैया के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा श्योपुर वन मंडल के विजयपुर क्षेत्र में तैनात तीन कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर चीते की सुरक्षा और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई है। मामले में विभागीय जांच भी जारी है।

दो संदिग्ध गिरफ्तार, हथियार भी बरामद

चीते की मौत के मामले में मुरैना पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के दौरान हथियार भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बरामद हथियार का इस्तेमाल चीते को गोली मारने में हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

जांच एजेंसियां घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और गोली चलाने के वास्तविक स्थान का पता लगाने में जुटी हैं। पुलिस और वन विभाग की टीमें आसपास के जंगलों और संदिग्ध ठिकानों पर भी जांच कर रही हैं।

जांच के लिए गठित STF, केंद्र की टीम भी कर रही पड़ताल

मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अक्टूबर को वन और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (STF) गठित किया था। इस टीम का नेतृत्व राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स के प्रभारी अधिकारी कर रहे हैं। टीम को घटना की परिस्थितियों, संदिग्धों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम भी भेजी है। केंद्रीय टीम घटना की जांच के साथ-साथ कूनो के आसपास चीते की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर रही है।

रेडियो कॉलर के जरिए तलाशे जा रहे अहम सुराग

जांच एजेंसियां चीते के रेडियो कॉलर से मिले डेटा का भी विश्लेषण कर रही हैं। इसके माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चीता गोली लगने के समय किस क्षेत्र में मौजूद था और घायल होने के बाद उसने कितनी दूरी तय की थी।

इसके साथ ही आसपास के गांवों में पूछताछ, संदिग्ध ठिकानों की तलाशी और हथियारों की जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस स्थान की पहचान करना है, जहां वास्तव में चीते पर गोली चलाई गई थी।

प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा पर उठे सवाल

भारत में चीतों को दोबारा बसाने के उद्देश्य से सितंबर 2022 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। इसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाया गया था। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क इस परियोजना का प्रमुख केंद्र है।

KNG22 की मौत ने एक बार फिर जंगल से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वन्यजीवों की आवाजाही संरक्षित क्षेत्र से बाहर होने पर उनकी निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

फिलहाल पुलिस और वन विभाग की जांच जारी है। आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट, बरामद हथियारों की जांच और गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।

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