विजयवाड़ा, 29 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के 14 जिलों में लगभग 2.24 लाख हेक्टेयर कृषि एवं बागवानी फसलें जलमग्न हो गईं या क्षतिग्रस्त हुई हैं। शुरुआती आकलन के अनुसार, करीब 3.45 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। तूफान के कारण हजारों पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई क्षेत्रों में सड़क तथा बिजली आपूर्ति व्यवस्था बाधित हुई।
2.24 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित, धान को सबसे ज्यादा नुकसान
आंध्र प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री किंजरापु अच्चन्नायडू ने केंद्र सरकार से प्रभावित किसानों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। राज्य के शुरुआती आकलन के मुताबिक, चक्रवात से 14 जिलों में लगभग 2,24,489 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं।
इनमें धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। धान की लगभग 2,09,460 हेक्टेयर फसल प्रभावित होने का अनुमान है। यह नुकसान ऐसे समय हुआ है, जब खरीफ सीजन की फसल पकने और कटाई के चरण में थी।
तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई। लगातार पानी भरने से अनाज के दाने बदरंग होने और उनमें अंकुर निकलने का खतरा भी बढ़ गया है। इससे किसानों को उपज की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इन जिलों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान
प्रारंभिक रिपोर्टों में पश्चिम गोदावरी जिले में सबसे अधिक फसल क्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा, काकीनाडा और पूर्वी गोदावरी जिलों में बड़ा नुकसान दर्ज किया गया।
प्रभावित जिलों का शुरुआती आकलन इस प्रकार है:
| जिला | प्रभावित फसल क्षेत्र |
|---|---|
| पश्चिम गोदावरी | 76,176 हेक्टेयर |
| डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा | 44,232 हेक्टेयर |
| काकीनाडा | 42,222 हेक्टेयर |
| पूर्वी गोदावरी | 29,866 हेक्टेयर |
| कृष्णा | 22,339 हेक्टेयर |
| बापटला | 4,032 हेक्टेयर |
ये आंकड़े शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित हैं। खेतों से पानी उतरने और विस्तृत निरीक्षण के बाद नुकसान का अंतिम आकलन अलग हो सकता है।
केले, नारियल और सब्जियों की फसलें भी प्रभावित
चक्रवात का असर केवल धान तक सीमित नहीं रहा। तेज हवाओं से केले के पौधे गिर गए, जबकि नारियल और पपीते के बागानों को भी नुकसान पहुंचा। कुछ इलाकों में सब्जियों के खेत पानी में डूब गए।
गोदावरी और कृष्णा डेल्टा जैसे कृषि क्षेत्रों में जलभराव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
बागवानी फसलों को नुकसान होने से उन किसानों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका है, जो स्थानीय बाजारों में फल और सब्जियां बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। नुकसान की वास्तविक मात्रा का पता पानी उतरने और कृषि विभाग के संयुक्त निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।
हजारों पेड़ उखड़े, सड़कें हुईं बाधित
चक्रवात अर्नब के दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर हवाएं चलीं, जबकि तेज झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। इन हवाओं ने तटीय इलाकों में पेड़ों और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया।
पश्चिम गोदावरी जिले में लगभग 4,000 पेड़ उखड़ने की सूचना दी गई है। कई पेड़ मुख्य सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात बाधित हुआ। राहत एवं बचाव दलों को रास्ते साफ करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम करना पड़ा।
कई क्षेत्रों में बिजली के खंभे और संचार टावर भी क्षतिग्रस्त हुए। इससे स्थानीय लोगों को बिजली तथा संचार सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ा।
तटीय पर्यावरण और समुद्र तटों को भी नुकसान
चक्रवात के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में तेज लहरें उठीं और कुछ स्थानों पर समुद्र तटों का कटाव बढ़ने की सूचना मिली। कोनसीमा जिले के कुछ तटीय गांवों के आसपास समुद्री लहरों ने तट सुरक्षा से जुड़े निर्माणों को नुकसान पहुंचाया।
तेज हवाओं से पेड़ गिरने और भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी जमा होने के कारण प्राकृतिक वनस्पति तथा स्थानीय आवासों पर भी दबाव पड़ा है। हालांकि, तटीय पारिस्थितिकी, मिट्टी के कटाव और प्राकृतिक आवासों को हुए कुल नुकसान का विस्तृत आकलन अभी सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों के लिए अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित तटीय क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव, जलभराव और वनस्पति के नुकसान की भरपाई के लिए किन उपायों की आवश्यकता होगी।
केंद्र से किसानों के लिए आर्थिक सहायता की मांग
फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य के कृषि मंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर सहायता मांगी है। मांग में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के नियमों के तहत राहत तथा कृषि इनपुट सब्सिडी उपलब्ध कराने का अनुरोध शामिल है।
राज्य सरकार ने प्रारंभिक आकलन के आधार पर जल्द सहायता जारी करने की मांग की है, ताकि प्रभावित किसान अगली कृषि गतिविधियों की तैयारी कर सकें। बारिश का पानी उतरने के बाद कृषि, बागवानी और राजस्व विभागों के अधिकारी संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इस प्रक्रिया से फसलों और प्रभावित किसानों की संख्या का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।
चक्रवात कमजोर हुआ, लेकिन नुकसान का आकलन जारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 29 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, तट पार करने के बाद चक्रवात अर्नब कमजोर होकर गहरे अवदाब और फिर अवदाब की ओर बढ़ रहा था। हालांकि, इसके प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ था।
मौसम में सुधार के बाद प्रभावित खेतों से पानी निकालना, सड़कों से गिरे पेड़ हटाना, बिजली आपूर्ति बहाल करना और फसलों के नुकसान का सर्वेक्षण करना प्राथमिक कार्य होंगे।
