एमपी हाईकोर्ट सख्त: अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को 2006 से मिले छठे वेतनमान का लाभ, 23 नवंबर को अगली सुनवाई

ईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का समय दिया था। हालिया सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है।

इस पर अदालत ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पक्ष रखा।

प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को मिल सकती है राहत

इस मामले को प्रदेशभर के अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 70 हजार शिक्षकों को पुरानी सेवा अवधि के आधार पर वेतन और अन्य सेवा लाभ मिलने की संभावना है।

हालांकि, अदालत की कार्यवाही में 497 शिक्षकों की याचिका और उससे संबंधित आदेश प्रमुख रूप से सामने आए हैं। प्रदेश के अन्य शिक्षकों को कितना और किस आधार पर लाभ मिलेगा, यह सरकार द्वारा आदेश लागू करने की प्रक्रिया, संबंधित नियमों और प्रत्येक शिक्षक के सेवा रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा।

इसलिए सभी शिक्षकों को स्वतः समान राशि मिलने या प्रत्येक कर्मचारी का वेतन एक निश्चित स्तर तक बढ़ने की बात को अभी अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

एरियर और मासिक वेतन में बढ़ोतरी की कितनी संभावना?

रिपोर्टों में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अनुमान लगाया गया है कि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना होने पर कुछ शिक्षकों को लगभग सात से आठ लाख रुपये या उससे अधिक का बकाया मिल सकता है। वहीं, कुछ मामलों में मासिक वेतन में 15 हजार से 20 हजार रुपये तक का अंतर आने की संभावना भी बताई गई है।

लेकिन ये आंकड़े अनुमान हैं, सभी शिक्षकों के लिए निश्चित भुगतान की घोषणा नहीं। वास्तविक एरियर और वेतन में अंतर शिक्षक की नियुक्ति तिथि, पूर्व में मिले वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धियों, सेवा अवधि और लागू वेतन निर्धारण नियमों के आधार पर ही तय किया जा सकेगा।

बकाया राशि पर ब्याज मिलने का प्रश्न भी संबंधित आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होगा। फिलहाल सरकार की ओर से सभी पात्र शिक्षकों के लिए किसी एक समान राशि के भुगतान की अंतिम घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।

23 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें

अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होनी है। इस तारीख तक राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन की दिशा में कदम उठाने होंगे।

यदि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं होता है, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना पड़ सकता है। ऐसे में अगली सुनवाई शिक्षकों के वेतनमान, पुरानी सेवा अवधि और संबंधित वित्तीय लाभों के मामले में महत्वपूर्ण होगी।

शिक्षकों को अब सरकार की ओर से आदेश लागू करने की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले अनुपालन संबंधी विवरण का इंतजार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *