राजस्थान की तर्ज पर बुंदेलखंड के 5 ऐतिहासिक किलों का होगा कायाकल्प, टीकमगढ़ को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी

टीकमगढ़ | 19 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। टीकमगढ़ जिले के पांच ऐतिहासिक किलों को राजस्थान की तर्ज पर विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत इन किलों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करने, पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने और उन्हें एक पर्यटन सर्किट से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिला प्रशासन ने इस संबंध में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भेजा है। योजना का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा करना है।

पांच ऐतिहासिक किलों को मिलेगा नया रूप

टीकमगढ़ जिले के पांच किलों को पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इनमें बल्देवगढ़, मोहनगढ़, चंद्रपुरा, पचेर घाट और अस्तौन के ऐतिहासिक किले शामिल हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, बल्देवगढ़ और मोहनगढ़ के किले पर्यटन विभाग को सौंपे जा चुके हैं, जबकि अस्तौन का किला पुरातत्व विभाग को हस्तांतरित किया गया है। पचेर घाट के किले को पर्यटन विभाग के अधीन लाने की प्रक्रिया जारी है। इन धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए आगे की प्रशासनिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

हेरिटेज वॉक और लाइट एंड साउंड शो होंगे आकर्षण

राजस्थान के ऐतिहासिक किलों और महलों को पर्यटन से जोड़ने के मॉडल पर बुंदेलखंड में भी नई सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत किलों में हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, बुंदेली व्यंजन केंद्र और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार जैसी गतिविधियां शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।

हेरिटेज वॉक के जरिए पर्यटक किलों की स्थापत्य कला, इतिहास और उनसे जुड़ी कहानियों को करीब से समझ सकेंगे। वहीं, लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाक्रम और सांस्कृतिक विरासत को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।

हालांकि, इन सुविधाओं की वास्तविक शुरुआत के लिए विस्तृत योजना, बजट और संबंधित विभागों की मंजूरी जरूरी होगी। फिलहाल, प्रशासन का प्रस्ताव इस दिशा में शुरुआती कदम है।

होम-स्टे और स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

टीकमगढ़ के किलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। यदि इन ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती है, तो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

योजना के तहत स्थानीय गाइड, लोक कलाकार, हस्तशिल्प कारीगर और छोटे व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होम-स्टे, पारंपरिक भोजन, स्थानीय परिवहन और क्षेत्रीय उत्पादों की बिक्री को भी बढ़ावा मिल सकता है।

बुंदेली व्यंजनों और स्थानीय हस्तशिल्प को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के नए विकल्प मिल सकते हैं।

पांचों किलों की क्या है खासियत?

  1. बल्देवगढ़ का किला

बल्देवगढ़ का ऐतिहासिक किला अपनी विशाल किलेबंदी और प्रसिद्ध तोप के लिए जाना जाता है। इसकी संरचना बुंदेलखंड के सैन्य इतिहास और तत्कालीन स्थापत्य परंपरा की झलक प्रस्तुत करती है। संरक्षण और पर्यटन विकास से इस किले को क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक आकर्षणों में शामिल करने में मदद मिल सकती है।

  1. मोहनगढ़ का किला

मोहनगढ़ का किला तालाब के बीच स्थित होने के कारण अपनी अलग पहचान रखता है। इसकी भौगोलिक स्थिति और आसपास का प्राकृतिक परिवेश इसे पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक बना सकता है। यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने से ऐतिहासिक विरासत के साथ प्राकृतिक दृश्यावलियों का अनुभव भी मिल सकेगा।

  1. चंद्रपुरा का किला

चंद्रपुरा का किला अपनी प्राचीन बावड़ी और ग्रामीण विरासत के कारण ऐतिहासिक महत्व रखता है। ऐसे स्थलों का संरक्षण क्षेत्र की पारंपरिक जल संरचनाओं और स्थानीय इतिहास को समझने में मदद कर सकता है।

  1. पचेर घाट का किला

धसान नदी के किनारे स्थित पचेर घाट का किला ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। नदी के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और किले की संरचना इसे पर्यटन सर्किट में शामिल करने के लिए उपयोगी बना सकती है।

  1. अस्तौन का किला

अस्तौन का किला तात्या टोपे से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों के कारण विशेष महत्व रखता है। इसके संरक्षण से बुंदेलखंड के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी स्मृतियों को सामने लाने का अवसर मिल सकता है।

राजस्थान मॉडल से क्या सीखने की तैयारी?

राजस्थान में ऐतिहासिक किलों और महलों को संरक्षित करते हुए पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसी तरह टीकमगढ़ के किलों को विकसित करने का उद्देश्य उन्हें केवल ऐतिहासिक स्मारक तक सीमित रखने के बजाय पर्यटन, संस्कृति और स्थानीय कारोबार से जोड़ना है।

इसके लिए किलों की मूल संरचना को सुरक्षित रखना, आसपास की सुविधाओं को बेहतर बनाना और पर्यटकों के लिए व्यवस्थित अनुभव तैयार करना अहम होगा। साथ ही, विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक इमारतों की मौलिकता और पुरातात्विक महत्व को बनाए रखना भी जरूरी है।

टीकमगढ़ को पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी

टीकमगढ़ जिले के पांच किलों के संरक्षण और विकास की योजना बुंदेलखंड को ऐतिहासिक पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर भी बढ़ सकते हैं।

हालांकि, योजना का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन, संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता, पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर निर्भर करेगा। अब पर्यटन विभाग के स्तर पर प्रस्ताव पर होने वाली कार्रवाई और आगे की योजनाओं पर नजर रहेगी।

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