नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
दिल्ली में यमुना नदी की सेहत को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। उत्तर दिल्ली के बुराड़ी इलाके में नदी के किनारे सैकड़ों, संभवतः हजारों मरी हुई मछलियां मिलने से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर खतरे की आशंका गहरा गई है। यह घटना 14 अक्टूबर को सामने आई, जिसके बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने नदी के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मछलियों की मौत का वास्तविक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
बुराड़ी में नदी किनारे मिलीं बड़ी संख्या में मृत मछलियां
उत्तर दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में यमुना के किनारे मछलियां मृत अवस्था में पाई गईं। न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी ने इस घटना की तस्वीरें और वीडियो साझा कर मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, मृत मछलियां नदी के उस हिस्से में मिलीं जो वजीराबाद बैराज के ऊपर स्थित है।
यह इलाका यमुना के अपेक्षाकृत साफ हिस्सों में गिना जाता है। ऐसे क्षेत्र में बड़ी संख्या में मछलियों का मरना पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने पानी से तेज दुर्गंध आने की भी बात कही है।
रासायनिक कचरे से प्रदूषण की आशंका, लेकिन पुष्टि नहीं
मछलियों की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि हरियाणा की ओर से नहरों के जरिए नदी में पहुंचने वाला रासायनिक कचरा इसकी वजह हो सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष से अभी मौतों का कारण स्थापित नहीं हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मछलियों की सामूहिक मौत के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम होना, औद्योगिक अपशिष्ट, विषैले रसायनों की मौजूदगी और नदी में प्रदूषकों का बढ़ना शामिल हैं। वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
यमुना में आने वाले नालों पर भी उठे सवाल
यमुना में प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने हरियाणा के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों से आने वाले अपशिष्ट जल की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्टों में पानीपत, करनाल और सोनीपत के आसपास से आने वाले कुछ नालों का उल्लेख किया गया है, जिनके जरिए प्रदूषित पानी नदी तक पहुंच सकता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, पानीपत में नाला नंबर 2 से जुड़ने वाले 105 अवैध डिस्चार्ज बिंदुओं की पहचान की गई थी। इनमें से 48 को बंद किए जाने की सूचना थी, जबकि बाकी 57 के खिलाफ कार्रवाई लंबित बताई गई थी। यह विवरण नदी में प्रदूषित अपशिष्ट के प्रवेश को रोकने की चुनौती को उजागर करता है।
पानी में ऑक्सीजन की कमी भी हो सकती है वजह
मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवित रहने के लिए पानी में पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन होना जरूरी है। जब नदी में सीवेज या जैविक अपशिष्ट की मात्रा बढ़ती है, तो उसे विघटित करने की प्रक्रिया पानी में उपलब्ध ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती है। इससे ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है और मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नदी में पानी का प्रवाह कम होने से प्रदूषकों का असर और गंभीर हो सकता है। हालांकि, बुराड़ी में हुई इस घटना में ऑक्सीजन की कमी की भूमिका कितनी थी, यह जांच के बिना निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बुराड़ी के पास यमुना में मछलियों के मरने की यह पहली घटना नहीं है। मई 2025 में भी इसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मृत मछलियां मिलने की खबर सामने आई थी। इसके अलावा, मई 2026 में पूर्वी दिल्ली की संजय झील में भी सैकड़ों मछलियों की मौत हुई थी। उस मामले में भीषण गर्मी, पानी का स्तर घटने और ऑक्सीजन की कमी जैसे संभावित कारणों पर चर्चा हुई थी।
बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं नदी और जलाशयों के पारिस्थितिक स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
जलीय जैव विविधता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
यमुना में मछलियों की सामूहिक मौत केवल पानी की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नदी पर निर्भर अन्य जीवों और पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चेतावनी हो सकती है। समय रहते प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी, सीवेज का उचित उपचार और नदी में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
इस मामले में पानी के नमूनों की जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा कि मछलियों की मौत किन कारणों से हुई। फिलहाल, किसी एक स्रोत या रसायन को इसका जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
