सागर, मध्य प्रदेश | 8 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण अभियान में बुधवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) भी चीतों का नया घर बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो से लाए गए दो चीतों को नौरादेही में तैयार किए गए सॉफ्ट रिलीज बाड़े में विमुक्त किया।
इन दोनों चीतों में नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 शामिल हैं। नौरादेही पहुंचने के बाद इन्हें क्रमशः ‘व्योम’ और ‘नीरा’ नाम दिया गया है। इस कदम के साथ मध्य प्रदेश में चीतों के लिए तीन अलग-अलग आवास हो गए हैं।
कूनो से नौरादेही तक पहुंची चीता संरक्षण की यात्रा
बुधवार सुबह कूनो नेशनल पार्क से नर थोलो और मादा CCB-3 को सुरक्षित तरीके से ट्रैंकुलाइज कर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के लिए रवाना किया गया। करीब 425 किलोमीटर की यात्रा के बाद दोनों चीतों को नौरादेही क्षेत्र में पहुंचाया गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने दोनों को सीधे खुले जंगल में छोड़ने के बजाय सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में विमुक्त किया। यह व्यवस्था चीतों को नए वातावरण के अनुकूल होने का समय देने के लिए तैयार की गई है।
पहले बाड़े में रहेंगे, फिर खुले जंगल में होगी रिहाई
दोनों चीतों को शुरुआत में सुरक्षित बाड़ों में रखा जाएगा। वन विभाग और विशेषज्ञ उनकी सेहत, व्यवहार और नए वातावरण में अनुकूलन पर लगातार नजर रखेंगे।
विशेषज्ञों के आकलन के बाद परिस्थितियां अनुकूल रहने पर चीतों को आगे बड़े क्षेत्र और फिर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इस चरणबद्ध प्रक्रिया का उद्देश्य नए आवास में चीतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
439 हेक्टेयर में तैयार हुआ चीता आवास
चीतों के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की मुहली रेंज में करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।
यहां क्वारंटीन और सॉफ्ट रिलीज बाड़ों के साथ सुरक्षा तथा निगरानी की व्यवस्था की गई है। रिपोर्टों के अनुसार सॉफ्ट रिलीज बाड़े करीब 14 फीट ऊंचे हैं और उनमें इलेक्ट्रिक पल्स तारों की कई परतें लगाई गई हैं, ताकि चीतों की सुरक्षा के साथ बाहरी वन्यजीवों की अनधिकृत आवाजाही को भी नियंत्रित किया जा सके।
अब एक ही बड़े वन क्षेत्र में चीता, बाघ और तेंदुआ
नौरादेही की सबसे खास बात यह है कि यहां पहले से ही बाघ और तेंदुए मौजूद हैं। चीतों के आने के बाद यह क्षेत्र बड़े शिकारी वन्यजीवों की तीन प्रमुख प्रजातियों वाला महत्वपूर्ण आवास बन गया है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुओं के अलावा भेड़िये और जंगली कुत्ते यानी ढोल जैसी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इसलिए भविष्य में खुले जंगल में चीतों का इन प्रजातियों के साथ सह-अस्तित्व वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय रहेगा।
114 साल बाद बुंदेलखंड में चीते
नौरादेही और सागर क्षेत्र में लंबे समय बाद एक बार फिर चीते लौटे हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार बुंदेलखंड क्षेत्र में करीब एक सदी से चीते नहीं थे।
अब प्रोजेक्ट चीता के विस्तार के साथ इस क्षेत्र को फिर से चीता आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। नौरादेही में चीतों की वापसी को बुंदेलखंड के वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है रिजर्व
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
यह क्षेत्र पहले नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के रूप में जाना जाता था। 2023 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। यहां विभिन्न प्रकार के जंगल और घासभूमि चीतों के लिए संभावित रूप से उपयुक्त आवास उपलब्ध कराते हैं।
अगले महीने दो और चीते लाने की तैयारी
नौरादेही में चीता पुनर्स्थापना की शुरुआत दो चीतों से हुई है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि अगले महीने दो और चीते यहां लाए जाएंगे।
चीता स्टीयरिंग कमेटी ने इस क्षेत्र में कुल चार चीतों को बसाने की मंजूरी दी है। इससे आने वाले समय में नौरादेही में चीता परिवार को और विस्तार मिल सकता है।
मध्य प्रदेश में अब तीन चीता आवास
नौरादेही में दो चीतों की रिहाई के साथ मध्य प्रदेश में अब चीता संरक्षण के तीन प्रमुख आवास हो गए हैं—
- कूनो नेशनल पार्क
- गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य
- वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही)
इससे राज्य में चीता संरक्षण का भौगोलिक दायरा पहले की तुलना में और बढ़ गया है।
वन्यजीव पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा
नौरादेही में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। आने वाले समय में यदि चीते खुले जंगल में सफलतापूर्वक अनुकूलित होते हैं, तो यह क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन सकता है।
इसके साथ स्थानीय स्तर पर गाइड, वाहन, होम-स्टे, होटल और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।
देश में चीतों की संख्या भी बढ़कर 60 हुई
नौरादेही में चीतों की रिहाई ऐसे समय हुई है जब भारत में चीता आबादी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया, जिसके बाद देश में चीतों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें 41 भारत में जन्मे चीते बताए गए हैं।
इस तरह एक तरफ कूनो में चीता आबादी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ नए आवास विकसित कर चीतों को अलग-अलग क्षेत्रों में बसाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
