मानसून की विदाई के बाद मुंबई की हवा बिगड़ी, कम बारिश और बदलती हवाओं ने बढ़ाई प्रदूषण की चिंता

मुंबई, 5 अक्टूबर 2026: मानसून की विदाई के साथ मुंबई की हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। अक्टूबर की शुरुआत में शहर में धुंध और प्रदूषण का असर दिखाई देने लगा है। कुछ दिन पहले मुंबई का AQI 100 के पार पहुंच गया था। विशेषज्ञों के अनुसार कम बारिश, शुष्क मौसम और हवा की दिशा में बदलाव के कारण धूल और प्रदूषक कण लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं।

मानसून ने समय से पहले लिया विदा

महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 3 अक्टूबर को शुरू हुई। यह मुंबई के लिए सामान्य समय से पहले हुई विदाई मानी जा रही है। राज्य के 21 जिलों में बारिश की कमी भी दर्ज की गई है।

मानसून के दौरान होने वाली बारिश हवा में मौजूद धूल और निलंबित प्रदूषक कणों को नीचे बैठाने में मदद करती है। अब बारिश की गतिविधियां कमजोर होने के साथ यह प्राकृतिक सफाई कम हो गई है।

AQI 100 के पार पहुंचा

अक्टूबर की शुरुआत में मुंबई की वायु गुणवत्ता में स्पष्ट गिरावट देखी गई। 3 अक्टूबर को CPCB के आंकड़ों के अनुसार शहर का समग्र AQI 111 दर्ज किया गया था। उस समय 20 सक्रिय मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 10 पर हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में थी।

वर्ली में AQI 178, कोलाबा में 143, देवनार में 141 और मझगांव में 138 तक पहुंचा था। PM2.5 और PM10 प्रमुख प्रदूषकों में शामिल रहे।

हालांकि 5 अक्टूबर को उपलब्ध CPCB/SAMEER आंकड़ों में मुंबई का AQI 89 दर्ज किया गया था, यानी उस समय शहर की समग्र हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में थी। इसका मतलब यह है कि प्रदूषण का स्तर रोजाना मौसम और हवा की परिस्थितियों के साथ बदल रहा है।

सिर्फ कम बारिश नहीं है प्रदूषण की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक मुंबई में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने का कारण केवल बारिश की कमी नहीं है। मानसून की वापसी के साथ हवा के पैटर्न में बदलाव और शुष्क हवा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

जमीन की तरफ से आने वाली हवाएं उत्तर की ओर से धूल और अन्य कणों को मुंबई की ओर ला सकती हैं। दूसरी तरफ, कमजोर हवाओं की स्थिति में शहर में ट्रैफिक, निर्माण गतिविधियों और सड़क की धूल से निकलने वाले प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में रह सकते हैं।

अल नीनो को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि मौजूदा समय में मुंबई में बढ़ी गर्मी और प्रदूषण को सीधे तौर पर केवल अल नीनो का परिणाम बताना उचित नहीं है।

मौजूदा परिस्थितियों में मानसून की जल्दी विदाई, स्थानीय हवाओं और शुष्क मौसम को तत्काल कारणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की संभावना मौसम के व्यापक पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।

निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ाएगा BMC

बढ़ते प्रदूषण के बीच मुंबई महानगरपालिका ने वार्ड स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए SOP लागू किए हैं। प्रत्येक वार्ड में कम से कम 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाने हैं।

इनमें बड़े निर्माण स्थल, पुनर्विकास परियोजनाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, मलबा जमा होने वाले स्थान, खुले में कचरा जलाने वाले क्षेत्र और अधिक ट्रैफिक वाले इलाके शामिल हैं।

निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के निर्देश

स्थानीय निगरानी टीमों को रोजाना कम से कम दो निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। डिमोलिशन साइट पर मलबे को ढकने, बैरिकेडिंग करने और पानी या मिस्टिंग के जरिए धूल को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है।

निर्माण परियोजनाओं से जुड़े डेवलपर्स और ठेकेदारों को आसपास की सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी दी गई है।

AQI बढ़ा तो सख्त होंगे कदम

CPCB के वर्गीकरण के अनुसार AQI 101 से 200 तक ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘बहुत खराब’ और 400 से ऊपर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

मुंबई के प्रदूषण नियंत्रण प्लान में AQI बढ़ने के साथ अतिरिक्त कदम उठाने का प्रावधान है। AQI 200 के पार जाने पर सड़क सफाई, पानी का छिड़काव और खुले में कचरा जलाने के खिलाफ कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है। अगर AQI 300 से ऊपर लगातार तीन दिन रहता है, तो संबंधित मॉनिटरिंग स्टेशन के 2 किलोमीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

आने वाले दिनों में मौसम की भूमिका अहम

मुंबई में मानसून की वापसी के बाद मौसम गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क हो रहा है। 5 अक्टूबर को IMD ने मुंबई और ठाणे में कुछ स्थानों पर गर्म और उमस भरी परिस्थितियों को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था। शहर में अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान था।

ऐसे मौसम में हवा की गति, बारिश और स्थानीय प्रदूषण स्रोत यह तय करेंगे कि आने वाले दिनों में मुंबई की वायु गुणवत्ता किस दिशा में जाती है।

प्रशासन के सामने चुनौती

मानसून की विदाई के बाद मुंबई में निर्माण कार्य, ट्रैफिक और सड़क की धूल से जुड़े प्रदूषण पर नियंत्रण महत्वपूर्ण हो गया है। प्रशासन ने हॉटस्पॉट की निगरानी और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के कदम शुरू किए हैं।

आने वाले हफ्तों में यदि बारिश कम रहती है और हवाएं कमजोर होती हैं, तो प्रदूषक कणों के वातावरण में बने रहने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं बारिश या तेज हवाएं होने पर हवा की गुणवत्ता में अस्थायी सुधार संभव है।

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