कानपुर, उत्तर प्रदेश | 11 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने नकली नोट छापने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी किराए के कमरे में प्रिंटर और दूसरे उपकरणों की मदद से नकली भारतीय करेंसी तैयार कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में शेर सिंह को कथित तौर पर इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है। खास बात यह है कि शेर सिंह की पढ़ाई केवल 5वीं कक्षा तक हुई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग मूल्यवर्ग के कुल ₹2,04,650 के नकली नोट बरामद किए हैं। इसके अलावा नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, कैंची, पेपर कटर, स्केल, स्याही और कागज समेत कई सामान भी जब्त किया गया है।
रेलबाजार इलाके में चल रहा था नकली नोटों का कारखाना
पुलिस के अनुसार, नकली नोट छापने की सूचना मिलने के बाद अपराध शाखा और रेलबाजार पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। टीम ने रामलीला मैदान के पास एक किराए के कमरे में दबिश दी।
पुलिस को संदेह था कि इसी जगह से नकली नोट तैयार किए जा रहे हैं। छापेमारी के दौरान टीम को वहां प्रिंटर और नोट तैयार करने से जुड़ी कई सामग्री मिली। मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
5वीं पास शेर सिंह को बताया गया मास्टरमाइंड
गिरफ्तार आरोपियों में शेर सिंह निवासी बांगरमऊ, उन्नाव को पुलिस ने गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बताया है। उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल 5वीं कक्षा तक बताई गई है।
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक शेर सिंह कंप्यूटर और प्रिंटर की मदद से नकली करेंसी तैयार करता था। इसके लिए विशेष कागज, स्याही और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था।
दो अन्य आरोपी भी गिरफ्तार
पुलिस ने शेर सिंह के साथ रोशन अली और सोमिल गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है।
रोशन अली कानपुर के मूलगंज इलाके से जुड़ा बताया गया है, जबकि सोमिल गुप्ता जालौन जिले का रहने वाला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तीनों की भूमिका क्या थी और नकली नोट तैयार करने से लेकर उन्हें बाजार में पहुंचाने तक कौन-कौन लोग इनके संपर्क में थे।
₹2 लाख से ज्यादा की नकली करेंसी बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को कुल ₹2,04,650 की नकली करेंसी मिली।
बरामद नोटों में सबसे ज्यादा संख्या 100 रुपये के नोटों की थी। पुलिस के अनुसार कुल 1,991 नकली 100 रुपये के नोट, 50 रुपये के 71 नोट और 500 रुपये के 4 नकली नोट बरामद किए गए।
इसके अलावा पुलिस ने नकली नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक प्रिंटर, कैंची, दो पेपर कटर, दो स्केल, स्याही की बोतलें और डिब्बियां, एक रिम कागज तथा अन्य सामान भी जब्त किया है।
एक असली के बदले तीन नकली नोट देने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच में नकली करेंसी को खपाने का एक अलग तरीका भी सामने आया है। आरोप है कि गिरोह कुछ लोगों को एक असली रुपये के बदले तीन रुपये के नकली नोट देने का सौदा करता था।
इस तरह कम असली रकम के बदले ज्यादा नकली नोट उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस के मुताबिक इन नकली नोटों को मुख्य रूप से छोटी दुकानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चलाने की कोशिश की जाती थी।
रेलवे स्टेशनों के आसपास खपाते थे नकली नोट
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का कथित नेटवर्क कानपुर सेंट्रल और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर सक्रिय था। इसके अलावा आसपास के जिलों के बाजारों में भी नकली नोटों को चलाने की कोशिश की जाती थी।
भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन और छोटी दुकानों को निशाना बनाने के पीछे यही वजह बताई जा रही है कि कम मूल्यवर्ग के नकली नोटों की पहचान कई बार तुरंत नहीं हो पाती।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में पहुंचाई और किन-किन इलाकों में इसका इस्तेमाल किया गया।
दूसरे शहरों में भी बदलते थे ठिकाना
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के ठिकाने बदलने की जानकारी भी मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में रेलवे स्टेशन के आसपास रैन बसेरों या अस्थायी ठिकानों में रुकते थे।
आरोप है कि जहां ठिकाना मिलता, वहीं नकली नोट तैयार करने की गतिविधि शुरू कर देते और कुछ समय बाद स्थान बदल देते थे। कानपुर में भी इसी तरह अस्थायी ठिकाना बनाकर नकली नोट छापने का काम किया जा रहा था।
पहले से दर्ज हैं आपराधिक मामले
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। शेर सिंह के खिलाफ चार, रोशन अली के खिलाफ सात और सोमिल गुप्ता के खिलाफ पांच आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
पुलिस अब इन पुराने मामलों और नकली करेंसी के कथित नेटवर्क के बीच किसी संबंध की भी जांच कर रही है।
सहारनपुर के नकली नोट मामले से कनेक्शन की भी जांच
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी से जुड़ा एक बड़ा मामला पहले से जांच के दायरे में है। इसी वजह से कानपुर में पकड़े गए गिरोह के संभावित कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
हालांकि, कानपुर के गिरोह का दूसरे मामले से सीधा संबंध अभी पुलिस जांच का विषय है। इसे फिलहाल स्थापित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उनका नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इनके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह भी सक्रिय है।
प्रिंटर से नकली करेंसी बनाने का पूरा खेल
पुलिस की कार्रवाई से यह सामने आया कि आरोपी किसी बड़े औद्योगिक सेटअप के बजाय प्रिंटर और सीमित उपकरणों की मदद से नकली नोट तैयार कर रहे थे।
एक प्रिंटर, विशेष कागज, स्याही और कटिंग उपकरणों की मदद से तैयार की गई नकली करेंसी को बाजार में चलाने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने मौके से मिले उपकरणों को जांच के लिए कब्जे में ले लिया है।
अब नेटवर्क की तलाश में पुलिस
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला फोकस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान पर है। पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट तैयार करने की तकनीक उन्हें किसने दी, कच्चा माल कहां से आता था और तैयार नोट किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में पहुंच चुकी है और क्या कानपुर के अलावा दूसरे जिलों में भी इसका इस्तेमाल किया गया है।
फिलहाल ₹2.04 लाख की नकली करेंसी, प्रिंटर और नोट बनाने से जुड़े उपकरणों की बरामदगी ने कानपुर में चल रहे इस कथित फर्जी करेंसी नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। पुलिस की आगे की जांच से इस पूरे नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
