नई दिल्ली | 5 अगस्त, 2026
संसद के मानसून सत्र के दौरान आज सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर रही। विपक्षी दलों ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और गांधी प्रतिमा से लेकर मुख्य द्वार तक एक लंबा मार्च निकाला। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं और वित्तीय घोटालों की जांच की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। दूसरी ओर, कड़े विरोध और भारी हंगामे के बीच भी केंद्र सरकार अपने विधाई एजेंडे पर पूरी तेजी से आगे बढ़ रही है। मानसून सत्र के अब तक के सफर में सरकार द्वारा पेश किए गए कुल 8 महत्वपूर्ण विधेयकों में से 3 प्रमुख बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पारित कराए जा चुके हैं।
1. संसद परिसर में विपक्ष का मार्च और आक्रामक प्रदर्शन
संसद की विधाई कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले विपक्षी दलों के तमाम सांसद हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर परिसर में एकत्र हुए:
- विपक्ष के मुख्य मुद्दे: प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों के अलावा देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरा।
- नारेबाजी और हंगामा: विपक्षी सांसदों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि जनता से जुड़े जरूरी और गंभीर विषयों पर सदन के भीतर चर्चा से बचने की कोशिश की जा रही है, जबकि मनमाने तरीके से विधेयकों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
2. विधाई कामकाज: भारी हंगामे के बावजूद 3 बिल दोनों सदनों में पास
एक तरफ जहां संसद के बाहर और अंदर विपक्ष का हंगामा जारी है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष अपनी कार्यनीति के तहत विधाई लक्ष्यों को पूरा करने में जुटा हुआ है:
- सफल पासिंग: सरकार ने इस मानसून सत्र में अब तक कुल 8 संशोधन और नए आर्थिक-प्रशासनिक विधेयक पेश किए हैं, जिनमें से 3 प्रमुख विधेयक दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की मुहर लगवाकर कानून बनने के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं।
- सुधारों पर जोर: पास हुए इन विधेयकों में कर प्रणाली (Taxation) को और अधिक पारदर्शी बनाने, डिजिटल बैंकिंग सिस्टम को सुगम करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
- बाकी बिलों पर बहस जारी: शेष बचे विधेयकों पर भी दोनों सदनों में लंबी चर्चाएं चल रही हैं। सत्ता पक्ष का पूरा प्रयास है कि भारी विरोध और गतिरोध के बीच भी तय समयसीमा के भीतर सभी महत्वपूर्ण विधाई कार्यों को पूरा कर लिया जाए, जिससे आगामी कार्य योजनाओं में कोई बाधा न आए।
