अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक परमाणु समझौता: इजराइल की आपत्तियों के बीच ट्रंप की मंजूरी, विशेषज्ञों ने जताई परमाणु हथियारों की होड़ की आशंका

वाशिंगटन/रियाद | 23 जुलाई, 2026

मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक नागरिक परमाणु सहयोग समझौते (Civilian Nuclear Cooperation Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा स्वीकृत इस बहुप्रतीक्षित समझौते के तहत सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा के विकास और अमेरिकी तकनीक के हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हालांकि, इस डील को लेकर इजराइल की कड़ी आपत्तियां हैं और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इसे परमाणु प्रसार (Nuclear Proliferation) की दिशा में एक खतरनाक कदम बताया है।

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समझौते की मुख्य बातें और प्रावधान

  • परमाणु संवर्धन (Uranium Enrichment): इस समझौते के तहत सऊदी अरब को अपनी ही जमीन पर यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने का एक संभावित मार्ग मिल गया है, जो लंबे समय से रियाद की मांग रही है। Financial Times
  • अमेरिकी कंपनियों को प्राथमिकता: ऊर्जा विभाग के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी कंपनियों (जैसे वेस्टिंगहाउस) को सऊदी अरब के बहु-अरब डॉलर के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में केंद्रीय भूमिका निभाने का अवसर देगा।
  • सुरक्षा उपाय और शर्तें: अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस डील में अमेरिकी तकनीक के दुरुपयोग को रोकने और रिएक्टर के ईंधन को सैन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट न होने देने के कड़े सुरक्षा मानक शामिल हैं। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इसमें पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों और ‘गोल्ड-स्टैंडर्ड’ प्रोटोकॉल की कुछ शर्तों में ढील दी गई है। TIME+ 2

इजराइल का विरोध और क्षेत्रीय चिंताएं

इस समझौते से इजराइल में गहरी नाराजगी और चिंता का माहौल है:

  • इजरायली अधिकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पड़ोसी देश द्वारा यूरेनियम संवर्धन की क्षमता हासिल करना इजराइल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। The Washington Post
  • पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेताओं ने इस डील को “एक गंभीर रणनीतिक भूल” करार दिया है, जिससे मध्य पूर्व में हथियारों की एक नई और खतरनाक दौड़ शुरू हो सकती है। The Washington Post
  • पहले इस तरह के समझौतों को सऊदी अरब द्वारा इजराइल को मान्यता देने (अब्राहम समझौते) से जोड़ा जा रहा था, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने इस बार इस शर्त को हटाकर सीधे तौर पर समझौता कर लिया है। The Washington Post

विशेषज्ञों की चेतावनी: “परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा” The Washington Post

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु मामलों के विशेषज्ञों ने इस डील की समय और इसकी शर्तों पर कड़े सवाल उठाए हैं।

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  • ईरान के साथ विरोधाभास: विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ अमेरिका ईरान के खिलाफ उसके परमाणु कार्यक्रम और संवर्धन गतिविधियों को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना एक विरोधाभासी और खतरनाक संदेश देता है। The Washington Post+ 1
  • प्रसार का जोखिम: परमाणु नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह समझौता नागरिक उद्देश्यों के लिए हो, लेकिन घरेलू स्तर पर संवर्धन की क्षमता हासिल करने से भविष्य में देशों के लिए गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने का मार्ग आसान हो जाता है। The Washington Post

अब इस समझौते को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के समक्ष समीक्षा के लिए भेजा जाएगा, जहाँ इस पर तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।

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