नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने सोमवार को नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। संसद मार्च के दौरान संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। इन मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई तथा परीक्षा घोटालों और कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित छात्रों एवं परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग शामिल रही। बैठक के बाद भी संगठन ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
CJP का कहना है कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET-UG 2026 और अन्य भर्ती परीक्षाओं में सामने आए कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। संगठन का आरोप है कि बार-बार परीक्षा विवाद सामने आने के बावजूद सरकार जवाबदेही तय करने में विफल रही है। इसी कारण शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना चाहिए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल जांच समितियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल की दूसरी प्रमुख मांग सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई से जुड़ी रही। CJP का आरोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान उन्हें हिरासत में लेकर अस्पताल भेजा गया, जिसे संगठन ने अनुचित कार्रवाई बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वांगचुक छात्रों की आवाज उठा रहे हैं और उन्हें आंदोलन से अलग करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। संगठन ने सरकार से मांग की कि उन्हें बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की भी समीक्षा की जाए।
तीसरी मांग उन छात्रों और परिवारों के लिए आर्थिक सहायता एवं मुआवजे की रही, जो परीक्षा घोटालों, भर्ती में देरी, कथित पुलिस कार्रवाई या मानसिक तनाव से प्रभावित हुए हैं। CJP का कहना है कि कई युवाओं ने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन बार-बार पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने से उनका समय, धन और मानसिक संतुलन प्रभावित हुआ। संगठन ने ऐसे सभी प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए विशेष राहत पैकेज, आर्थिक सहायता और जवाबदेही तय करने की मांग की।
जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने बैठक को “बेनतीजा” बताते हुए कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और सरकार तीनों मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक जंतर-मंतर पर धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने देशभर के युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।
इस बीच जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए, जिसके चलते दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। हाल के दिनों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच झड़पें भी हुई थीं, जिनमें कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है और कई विपक्षी दलों तथा सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।
सरकार की ओर से फिलहाल इन तीनों मांगों को स्वीकार करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर CJP ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को दिल्ली से बाहर देशव्यापी अभियान का रूप दिया जाएगा। संगठन का दावा है कि आने वाले दिनों में विभिन्न राज्यों के छात्र संगठन भी इस आंदोलन से जुड़ सकते हैं।
