स्थान: वाशिंगटन
दिनांक: 16 जुलाई, 2026
अमेरिकी संसद में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध विधेयक (Sanctioning Russia Act of 2026) पेश किया गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है [1.2.2, 1.3.3]।
इस विधेयक से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- टैरिफ में कटौती: पहले इस विधेयक में रूसी तेल और गैस खरीदने वाले सभी देशों पर 500% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, जिसे अब घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है [1.1.1, 1.3.1]।
- किन देशों पर लागू होगा: यह प्रस्तावित 100% टैरिफ सभी देशों पर नहीं, बल्कि केवल उन शीर्ष 5 देशों पर लागू होगा जो रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं [1.1.1, 1.3.1]। वर्तमान में इन पांच देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान शामिल हैं [1.1.2, 1.2.3]।
- राष्ट्रपति को छूट देने का अधिकार: इस विधेयक की एक महत्वपूर्ण धारा राष्ट्रपति को यह अधिकार देती है कि यदि उन्हें लगता है कि किसी देश को छूट देना अमेरिकी राष्ट्रीय हित में है, तो वे इन प्रतिबंधों या टैरिफ को माफ कर सकते हैं [1.1.1, 1.1.2]।
- विधेयक का उद्देश्य: इस कदम का मुख्य लक्ष्य रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के लिए रूस के पास धन की कमी हो सके [1.1.3, 1.2.2]।
- वर्तमान स्थिति: यह विधेयक अभी अमेरिकी संसद (सीनेट) में विचाराधीन है और इसे कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी [1.3.1]। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विधेयक का समर्थन किया है और इसे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को सम्मान देने का एक जरिया बताया है [1.2.4]।
निष्कर्ष:
हालांकि, भारत सहित इन पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है, लेकिन यह अभी एक ‘प्रस्तावित कानून’ है [1.3.1]। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के पास उपलब्ध ‘वेवर’ (छूट) की शक्ति और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के कारण, इसे लागू करने के निर्णय में कई व्यावहारिक चुनौतियां हो सकती हैं [1.2.2, 1.2.4]।
इस विधेयक के पारित होने की स्थिति, भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार पर इसके प्रभाव
