नई दिल्ली | 15 जुलाई, 2026
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (Free Trade Agreement – FTA) आज, 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है [1.1.1, 1.2.2]। इसे ‘भारत-UK व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) नाम दिया गया है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत है [1.2.2, 1.3.2]।
इस समझौते से न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन का बाजार खुलेगा, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी कई ब्रिटिश उत्पाद सस्ते और सुलभ हो जाएंगे [1.2.2, 1.3.1]।
क्या सस्ता होगा और क्या बदलेगा?
इस समझौते के तहत, भारत ने कई ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क (Customs Duty) में कटौती की है, जिससे उनकी कीमतें कम होने की उम्मीद है [1.3.1, 1.3.2]:
- स्कॉच व्हिस्की और अन्य शराब: यह इस समझौते का सबसे चर्चित हिस्सा है। स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से 150% से घटाकर 75% कर दिया गया है, जिसे अगले 10 वर्षों में धीरे-धीरे घटाकर 40% तक लाया जाएगा [1.3.1, 1.3.2]। इसके अलावा जिन, वोदका और अन्य प्रीमियम शराबों पर भी ड्यूटी कम हुई है [1.3.2]।
- लग्जरी कारें: ब्रिटेन से आने वाली पूरी तरह से निर्मित (Fully Built Units) लग्जरी कारों पर आयात शुल्क, जो अभी 110% तक है, उसे 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा [1.3.1, 1.3.2]। इसमें रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन, मैकलारेन और लैंड रोवर जैसे ब्रांड्स शामिल हैं [1.3.1]।
- कॉस्मेटिक्स और चॉकलेट: ब्रिटेन से आने वाले चॉकलेट, बिस्कुट, सॉफ्ट ड्रिंक्स और सौंदर्य प्रसाधनों (Cosmetics) पर भी आयात शुल्क में भारी कमी की गई है, जिससे ये उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते होंगे [1.3.1, 1.3.2]।
- अन्य वस्तुएं: समझौते के तहत चांदी जैसी कमोडिटी पर भी आयात शुल्क कम किया गया है [1.3.2]।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने भी भारतीय उत्पादों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं [1.3.1]:
- ब्रिटेन भारतीय निर्यातकों को लगभग 99% उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) पहुंच प्रदान कर रहा है [1.2.2, 1.3.1]।
- इससे भारतीय कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Foods) को ब्रिटिश बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी [1.2.3, 1.3.1]।
- कपड़ा उद्योग पर जो पहले 12% तक का शुल्क लगता था, उसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय गारमेंट्स वहां अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे [1.2.3]।
आम उपभोक्ता के लिए क्या है खास?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि ड्यूटी में कमी से कीमतों में राहत मिलेगी, लेकिन इसका असर बाजार में दिखने में थोड़ा समय लग सकता है [1.3.3]। व्हिस्की जैसे उत्पादों पर स्थानीय करों (State Excise Duties) और अन्य नियामक प्रक्रियाओं के कारण कीमतों में तत्काल बहुत बड़ी गिरावट न भी दिखे, लेकिन ‘मिड-प्रीमियम’ सेगमेंट में उपभोक्ताओं को कीमतों में सुधार जरूर महसूस होगा [1.3.3]।
यह समझौता न केवल आर्थिक रूप से दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे व्यापार में सुगमता भी बढ़ेगी क्योंकि दोनों देशों ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई है [1.1.1, 1.2.2]।
