बांग्लादेशी सियासत में बड़ा धमाका: निर्वासन से दिसंबर में घर लौटेंगी शेख हसीना; कहा— ‘गिरफ्तारी या मौत मंजूर, पर अपनी मिट्टी पर ही आखिरी सांस लेना चाहती हूं’; अदालत में करेंगी आत्मसमर्पण

स्थान: नई दिल्ली / ढाका

दिनांक: 11 जुलाई, 2026

अंतरराष्ट्रीय डेस्क:

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने एक बेहद साहसी और चौंकाने वाला ऐलान किया है। अगस्त 2024 में हुए जन-विद्रोह के बाद से भारत में रह रहीं 78 वर्षीय हसीना ने घोषणा की है कि वे इस साल दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनकी अवामी लीग के वरिष्ठ नेता वहां पहुंचकर सीधे अदालत (Court) में आत्मसमर्पण (Surrender) करेंगे।

विदेशी न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में शेख हसीना ने अपने लौटने के इरादों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन को लेकर गंभीर खतरे का आभास है, लेकिन वे अब और अधिक समय तक निर्वासन में नहीं रहना चाहतीं।

“जान का खतरा है, लेकिन देश जाना ही होगा”— शेख हसीना

साक्षात्कार के दौरान शेख हसीना ने अत्यंत भावुक अंदाज में कहा कि बांग्लादेश में उनके पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिस प्रकार के दमन का सामना करना पड़ रहा है, उसे देखते हुए उनका वापस लौटना अनिवार्य हो गया है।

हसीना का भावुक बयान:

“मेरे लौटने पर वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, या मेरी हत्या भी कर सकते हैं। मुझे पता है कि स्थिति बहुत खतरनाक है। लेकिन इसके बावजूद मुझे जाना ही होगा। अगर मौत आनी ही है, तो मैं चाहती हूँ कि वह मेरी अपनी जमीन पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।”

कानूनी घेरा और ‘दिखावटी’ अदालती कार्यवाही

नवंबर 2025 में बांग्लादेश के ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’ (International Crimes Tribunal) ने हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुए दमन के लिए ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड (Death Sentence) की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार के भी कई मामले दर्ज हैं।

  • अदालत को चुनौती: अपनी वापसी के फैसले पर उन्होंने कहा, “मुझे न्याय पर विश्वास है। मुझे लगता है कि एक बार जब कानूनी कार्यवाही शुरू होगी, तो यह पूरी दुनिया और बांग्लादेश की जनता के सामने साफ हो जाएगा कि ये मुकदमे कितने ‘फर्जी’ (Farcical) और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं। मैं खुद अदालत जाकर यह साबित करना चाहती हूं।”

तारिक रहमान सरकार के लिए बड़ी चुनौती

शेख हसीना का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब ढाका में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है। शेख हसीना के इस कदम ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

  • प्रत्यर्पण का दबाव: ढाका स्थित अधिकारी लगातार भारत सरकार को पत्र लिखकर उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रहे हैं। हालांकि, हसीना ने कहा, “वे मुझे भारत से वापस ले जाने के लिए चिट्ठियां लिख रहे हैं, लेकिन मैं उनके प्रत्यर्पण का इंतजार नहीं करूंगी। मैं खुद वापस जाऊंगी और अपने साथियों के साथ अदालत में सरेंडर करूंगी।”
  • राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई: अवामी लीग के नेताओं का मानना है कि शेख हसीना की वापसी पार्टी में नई जान फूंकेगी और जनता के बीच ‘समावेशी राजनीति’ (Inclusive Politics) की मांग को और तेज करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेख हसीना दिसंबर में वापस लौटती हैं, तो यह बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के लिए एक कठिन परीक्षा होगी। उनकी वापसी न केवल देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित करेगी, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक रिश्तों के लिए भी एक नई स्थिति पैदा करेगी।

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