स्थान: वेट्जलार (जर्मनी)
दिनांक: 11 जुलाई, 2026
खेल डेस्क:
भारतीय एथलेटिक्स जगत से एक और शानदार खबर सामने आई है। भारत के उभरते हुए स्प्रिंटर अनिमेष कुजूर (Animesh Kujur) ने जर्मनी में आयोजित ‘प्यूमा फास्ट आर्म्स फास्ट लेग्स’ (PUMA Fast Arms Fast Legs 2026) मीट में अपनी गति का लोहा मनवाते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने 100 मीटर की दौड़ को महज 10.14 सेकेंड में पूरा कर विदेशी धरती पर किसी भी भारतीय द्वारा लगाई गई अब तक की सबसे तेज दौड़ का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
जर्मनी में अनिमेष का शानदार प्रदर्शन
वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर चैलेंजर-लेवल की इस प्रतियोगिता में अनिमेष ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) प्रदर्शन किया।
- दौड़ का विवरण: फाइनल मुकाबले में अनिमेष ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए अपनी लय बरकरार रखी और 10.14 सेकेंड के समय के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। दक्षिण अफ्रीका के अंडर-18 वर्ल्ड चैंपियन रेतशिदिसित्सवे म्लेंगा (Retshidisitswe Mlenga) ने 10.03 सेकेंड के साथ स्वर्ण पदक जीता।
- रिकॉर्ड की अहमियत: यह न केवल अनिमेष का अब तक का सबसे बेहतरीन समय है, बल्कि यह किसी भी भारतीय धावक द्वारा भारत से बाहर निकाली गई सबसे तेज टाइमिंग है। इससे पहले उनका पर्सनल बेस्ट 10.15 सेकेंड था।
भारतीय स्प्रिंट इतिहास में स्थान
अनिमेष कुजूर का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में दूसरे नंबर का सबसे तेज 100 मीटर समय है।
तुलनात्मक स्थिति:
फिलहाल भारत का राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National Record) 10.09 सेकेंड का है, जिसे इसी साल मई में रांची में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान गुरिंदरवीर सिंह ने बनाया था। अनिमेष कुजूर लगातार गुरिंदरवीर के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जिससे भारतीय स्प्रिंटिंग का स्तर वैश्विक मानकों के करीब पहुंच रहा है।
अगला लक्ष्य: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स
जर्मनी की इस मीट के बाद अनिमेष कुजूर पोलैंड के स्पाला (Spala) में भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर से जुड़ेंगे। वे पहले ही 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के लिए 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अनिमेष की निरंतरता और तेजी उन्हें ग्लासगो में होने वाले इन खेलों में पदक का प्रबल दावेदार बनाती है।
उड़ीसा के रहने वाले 23 वर्षीय अनिमेष की इस उपलब्धि से पूरे देश में खुशी की लहर है और उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
