स्थान: यरूशलेम / वाशिंगटन
दिनांक: 10 जुलाई, 2026
अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो:
अमेरिका द्वारा ईरान के 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर किए गए दो चरणों के भीषण हवाई हमलों के बाद अब पश्चिम एशिया (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खुफिया रिपोर्ट सामने आ रही है। राजनयिक और रक्षा सूत्रों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, इजराइल अब ईरान पर सीधे और अब तक का सबसे बड़ा विनाशकारी सैन्य हमला (Direct Air Strike) करने की योजना बना चुका है।
इजराइली रक्षा बलों (IDF) और खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) ने ईरान के बचे हुए परमाणु प्रतिष्ठानों (Nuclear Sites) और रणनीतिक ठिकानों की नई सूची तैयार कर ली है। तेल अवीव में हुई कैबिनेट की आपातकालीन बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि इजराइल इस कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी (Green Signal) का इंतजार है। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल इस बार अकेले नहीं, बल्कि अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर एक ‘ज्वाइंट ऑपरेशन’ (Joint Combat Operation) को अंजाम देने की रणनीति पर काम कर रहा है।
खुफिया इनपुट: निशाने पर ईरान के नतांज और फोर्डो परमाणु संयंत्र
यरूशलेम से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि ईरान द्वारा हाल ही में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी अड्डों पर दागी गई मिसाइलों के बाद अब तेहरान को पूरी तरह पंगु बनाने का यही सबसे सही समय है।
- अंतिम वार की तैयारी: अमेरिकी हमलों ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय रडार नेटवर्क को पहले ही 70% तक ध्वस्त कर दिया है। इजराइल इस स्थिति का फायदा उठाकर ईरान के सबसे सुरक्षित नतांज (Natanz) और फोर्डो (Fordow) भूमिगत परमाणु संवर्धन केंद्रों को नेस्तनाबूद करना चाहता है।
- ट्रंप की सहमति का पेंच: इजराइली रक्षा मंत्री ने बुधवार रात अमेरिकी रक्षा मंत्री से फोन पर लंबी चर्चा की। इजराइल चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस हमले को अपनी आधिकारिक सैन्य सहमति दें, ताकि अमेरिकी बंकर-बस्टर बमों (GBU-57) का इस्तेमाल कर ईरान के पहाड़ों के नीचे छिपे बंकरों को तोड़ा जा सके।
व्हाइट हाउस की दुविधा: वैश्विक तेल संकट और युद्ध के विस्तार का डर
वाशिंगटन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजराइल की इस आक्रामक योजना से सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं, लेकिन वे इसके ‘टाइमिंग’ को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन की चिंता:
पिछले 48 घंटों में अमेरिका द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें पहले ही $92 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। यदि इजराइल ने सीधे ईरान पर हमला किया, तो ईरान ओमान की खाड़ी में बचे-खुचे तेल टैंकरों पर आत्मघाती ड्रोन हमले कर सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। ट्रंप चाहते हैं कि पहले खाड़ी देशों (सऊदी अरब और यूएई) के तेल कूटनीति के जरिए सुरक्षा घेरे को और मजबूत किया जाए, उसके बाद ही इजराइल को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।
48 घंटे के भीतर खाड़ी युद्ध का वर्तमान समीकरण और सैन्य जमावड़ा
| देश / ब्लॉक | वर्तमान सैन्य स्थिति | संभावित अगली बड़ी कार्रवाई |
| इजराइल 🇮🇪 | वायुसेना के F-35 स्टील्थ फाइटर्स ‘स्टैंडबाय’ मोड पर; भूमध्य सागर में युद्धपोत तैनात। | ट्रंप की मंजूरी मिलते ही ईरान के परमाणु और कमांड सेंटर्स पर कारपेट बॉम्बिंग की योजना। |
| संयुक्त राज्य अमेरिका 🇺🇸 | दो चरणों में ईरान के 170 ठिकानों को उड़ाया; 5वें बेड़े (5th Fleet) को हाई अलर्ट पर रखा। | इजराइल को खुफिया सैटेलाइट डेटा और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों (Refuelers) की मदद देने को तैयार। |
| ईरान 🇮🇷 | देश में पूर्ण सैन्य लामबंदी (Full Mobilization); अंडरग्राउंड मिसाइलें लॉन्च पैड पर तैनात। | इजराइल के तेल अवीव और डिमोना परमाणु रिएक्टर पर सैकड़ों शाहब-3 मिसाइलें दागने की जवाबी धमकी। |
रूस और चीन की चेतावनी— ‘अगर इजराइल कूदा, तो परिणाम भुगतने होंगे’
पश्चिम एशिया के इस खतरनाक घटनाक्रम पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी विदेश मंत्रालय ने सख्त आपत्ति जताई है। क्रेमलिन (रूस) ने एक बयान जारी कर कहा है कि यदि अमेरिका की शह पर इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को छुआ, तो रूस चुप नहीं बैठेगा और वह ईरान को हर संभव आधुनिक सैन्य सहायता (जैसे S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की नई खेप) तुरंत मुहैया कराएगा।
इस बीच, पूरे मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध का तनाव चरम पर पहुंच चुका है। सीरिया, लेबनान और यमन में सक्रिय ईरानी प्रॉक्सी संगठन भी इजराइल की सीमाओं पर रॉकेट दागने की फिराक में हैं। दुनिया भर के राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी 24 घंटों में इजराइल की इस योजना को ट्रंप की मंजूरी मिल जाती है, तो यह सदी का सबसे भयानक और विनाशकारी अंतरराष्ट्रीय युद्ध साबित हो सकता है।
