स्थान: रतलाम / भोपाल
दिनांक: 10 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, रतलाम:
मध्य प्रदेश में विकास कार्यों और क्षेत्र की सड़कों की मांग को लेकर सत्ताधारी दल के भीतर का अंतर्विरोध एक बार फिर सरेआम सार्वजनिक मंच पर आ गया है। रतलाम में आयोजित एक बड़े शासकीय कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार के सामने क्षेत्र की जर्जर सड़कों की उपेक्षा को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त की। भावुक हुए विधायक ने मंच से ही ऐलान कर दिया कि जब तक उनके विधानसभा क्षेत्र की सभी 16 मुख्य सड़कों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो जाता, वे जूते-चप्पल धारण नहीं करेंगे और नंगे पैर ही घूमेंगे।
विधायक की इस सीधी जिद और ‘अल्टीमेटम’ पर वहां मौजूद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंच से ही कड़ा और स्पष्ट जवाब देकर स्थिति संभाली। मुख्यमंत्री ने तल्ख लहजे में कहा कि सरकार किसी एक मांग पर नहीं बल्कि समग्र विकास पर काम करती है, इसलिए वे ’16 नहीं बल्कि 17 सड़कें देंगे’, लेकिन जनप्रतिनिधियों को अपनी बात और शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
विधायक का दर्द: “जनता को क्या मुंह दिखाऊं, अब बिना जूते-चप्पल के रहूंगा”
यह पूरा घटनाक्रम केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में हुआ, जहां करोड़ों रुपये के नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण किया जा रहा था।
- मंच से फूटा गुस्सा: शासकीय कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए स्थानीय भाजपा विधायक ने कहा कि पिछले लंबे समय से वे लोक निर्माण विभाग (PWD) और मुख्यमंत्री कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके क्षेत्र की ग्रामीण सड़कों की फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। सड़कों के गड्ढों के कारण जनता परेशान है और वे जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं बचे हैं।
- जूते त्यागने की घोषणा: अपनी बात को पुरजोर तरीके से रखने के लिए विधायक ने मंच पर ही अपने जूते उतार दिए और प्रण लिया कि जब तक सड़कों की स्वीकृति के सरकारी आदेश जारी नहीं हो जाते, वे नंगे पैर ही पदयात्रा करेंगे। इस भावनात्मक ऐलान से पंडाल में मौजूद जनता और मंच पर बैठे नेता अवाक रह गए।
सीएम मोहन यादव का पलटवार: “हमारे जूते-चप्पल दौड़ लगाने के लिए हैं, कांटों से बचने के लिए हैं”
मंच पर ही प्रोटोकॉल टूटने और विधायक की सार्वजनिक जिद को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने संबोधन में विधायक को सीधे टोकते हुए नसीहत दी।
मुख्यमंत्री का दोटूक जवाब:
मुख्यमंत्री ने कहा, “विकास के काम एक तय प्रक्रिया और बजट के तहत होते हैं। विधायक जी को जूते-चप्पल छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे जूते और चप्पल जनता की सेवा में दौड़ लगाने के लिए होते हैं, पैरों को कांटों से बचाने के लिए होते हैं। अगर आप 16 सड़कों की मांग कर रहे हैं, तो यह भाजपा की सरकार है, हम 16 नहीं बल्कि 17 सड़कें मंजूर करेंगे। लेकिन सार्वजनिक मंचों से अपनी ही सरकार के सामने ऐसी जिद दिखाने वाले नेताओं को अपने शब्दों के चयन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।”
हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट: 120 की रफ्तार से गुजरा गडकरी का काफिला
इस सियासी ड्रामे के इतर, रतलाम दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का वीआईपी काफिला रतलाम के शिवगढ़ ब्रिज के पास से बेहद तेज गति में गुजरा।
- 19 गाड़ियों का काफिला: केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में लगे 19 वाहनों का काफिला लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हाईवे से गुजरा। चूंकि यह क्षेत्र ग्रामीण आबादी और स्कूली बच्चों के आवागमन का मुख्य मार्ग है, इसलिए इतनी तेज रफ्तार में वीआईपी गाड़ियों के एक साथ गुजरने से स्थानीय लोग हैरान रह गए और कुछ पलों के लिए यातायात पूरी तरह थम गया।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चर्चा: स्थानीय नागरिक संगठनों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान रूट को पूरी तरह सैनिटाइज (खाली) किया जाना चाहिए था, ताकि इतनी तेज गति में गाड़ियों के गुजरने से किसी बड़े हादसे की आशंका न रहे।
रतलाम मंच पर घटे घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
| पात्र / पक्ष | किया गया कृत्य / बयान | वर्तमान प्रशासनिक व राजनैतिक स्थिति |
| क्षेत्रीय भाजपा विधायक | क्षेत्र की 16 सड़कों के निर्माण की मांग को लेकर मंच पर जूते त्यागे। | राजनैतिक हलकों में अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती सुर के रूप में चर्चा तेज। |
| मुख्यमंत्री मोहन यादव | 16 की जगह 17 सड़कों की घोषणा की, पर विधायक को मर्यादा में रहने की नसीहत दी। | मुख्यमंत्री ने साफ किया कि दबाव की राजनीति बर्दाश्त नहीं होगी, विकास नियमों से होगा। |
| केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी | मध्य प्रदेश में अगले 2 साल में अमेरिका जैसा रोड नेटवर्क बनाने का भरोसा दिया। | ₹10,000 करोड़ से अधिक की नई सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दी। |
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा के मानसून सत्र से पहले जमीनी स्तर पर ग्रामीण अधोसंरचना (Infrastructure) को लेकर विधायकों पर भारी जनता का दबाव है। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा मंच से ही 17 सड़कों की बड़ी मंजूरी दिए जाने के बाद प्रशासन ने तुरंत उन मार्गों का सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि विधायक की नाराजगी को दूर किया जा सके।
