स्थान: भोपाल (मंत्रालय)
दिनांक: 7 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, भोपाल:
मध्य प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) के शुरू होने से ठीक पहले स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। राजनेताओं के रसूख और मंत्रालय के रसूखदार बाबुओं की सेवा में लगे 213 सरकारी शिक्षकों का गैर-कानूनी अटैचमेंट (संलग्नीकरण) तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया गया है।
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेश के 16 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि विभिन्न विधायकों के पीए (Personal Assistant), जनप्रनिधियों के स्टाफ और मंत्रालयों के दफ्तरों में क्लर्क (बाबू) बने इन शिक्षकों को 48 घंटे के भीतर कार्यमुक्त (Relieve) कर उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में वापस भेजा जाए।
विधानसभा का डर: सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा के सवाल ने हिलाया विभाग
इस बड़ी कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक इच्छाशक्ति से ज्यादा विधानसभा में पूछे गए एक तीखे सवाल का डर है। पिछले सत्र के दौरान सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने तारांकित प्रश्न क्रमांक-1108 के माध्यम से यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जबकि सैकड़ों शिक्षक रसूख के बल पर मलाईदार गैर-शैक्षणिक पदों पर कुर्सियां तोड़ रहे हैं।
जांच में खुले चौकाने वाले मामले:
डीपीआई द्वारा कराई गई गोपनीय समीक्षा में सामने आया कि भोपाल के शासकीय प्राथमिक पाठशाला परवलिया की प्राथमिक शिक्षिका प्रियंका शर्मा अगस्त 2023 से विमुक्त जाति आश्रम इब्राहिमपुरा, बैरसिया में अटैच होकर वीआईपी सेवाएं दे रही थीं। इसी तरह, नरसिंहपुर के सांदीपनि शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के लेक्चरर पुरुषोत्तम प्रसाद तिवारी जनवरी 2022 से महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल में अटैचमेंट कराकर मजे कर रहे थे। ऐसे 213 से ज्यादा मामले उजागर हुए हैं।
इन 16 जिलों में सबसे ज्यादा हुआ था ‘रसूख का खेल’
समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के चंबल, ग्वालियर और विंध्य संभागों के जिलों में शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर दफ्तरों में बाबू बनाने का खेल सबसे ज्यादा चला।
- ग्वालियर-चंबल और विंध्य टॉप पर: जिन 16 जिलों में तत्काल रिलीविंग के आदेश जारी हुए हैं, उनमें ग्वालियर, भिंड, श्योपुर, गुना, दतिया, रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, कटनी, शहडोल, उज्जैन, देवास, नीमच, राजगढ़ और मंडला शामिल हैं।
- वेतन रोकने की चेतावनी: डीपीआई ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या संकुल प्राचार्य ने इन शिक्षकों को कार्यमुक्त करने में आनाकानी की या राजनीतिक दबाव में आकर आदेश को रोकने की कोशिश की, तो संबंधित अधिकारी का वेतन (Salary) रोक दिया जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) होगी।
शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक अटैचमेंट पर विभाग का सख्त रुख
| अटैचमेंट का स्थान / पद | विभाग का नया आदेश | बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव |
| विधायकों के पीए / स्टाफ | तत्काल मूल स्कूल में आमद दर्ज कराएं। | ग्रामीण क्षेत्रों के मिडिल और हाई स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी। |
| मंत्रालय / जेडी दफ्तर में बाबू | 48 घंटे के भीतर रिलीविंग अनिवार्य। | ई-अटेंडेंस और बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में सुधार के लिए कड़े कदम। |
स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नए सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है और विभाग इस बार स्कूलों में 100% ई-अटेंडेंस (E-Attendance) को अनिवार्य कर चुका है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के जिन स्कूलों से ये शिक्षक गायब थे, वहां बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा था। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष या खुद सत्तापक्ष के विधायक इस मुद्दे पर सरकार को न घेर सकें, इसलिए सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार ने इस ‘डैमेज कंट्रोल’ (प्रशासनिक सर्जरी) को अंजाम दे दिया है।
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की नई रिलीविंग लिस्ट, जिलावार शिक्षकों की सूची और विधानसभा मानसून सत्र 2026 के लाइव अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट के ‘एजुकेशन & ब्यूरोक्रेसी’ कॉरिडोर को लगातार विजिट करते रहें।
