सियासी गलियारों से बड़ी खबर: अब दक्षिण भारत में चला पूर्व सीएम शिवराज का जादू, ‘मामा’ के दीवाने हुए कांग्रेसी विधायक; दिल्ली में चिट्ठी कांड के बाद कैलाश विजयवर्गीय के बदले सुर

स्थान: भोपाल / बेंगलुरु

दिनांक: 3 जुलाई, 2026

विशेष ब्यूरो, भोपाल:

मध्य प्रदेश और केंद्र की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का क्रेज हिंदी पट्टी के बाद अब दक्षिण भारत (South India) में भी सिर चढ़कर बोल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सूबे के कद्दावर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के बदले-बदले तेवर चर्चा का मुख्य विषय बने हुए हैं।

विगत दिनों दिल्ली दरबार में हुए एक कथित ‘चिट्ठी कांड’ के बाद विजयवर्गीय के तेवरों में आई नरमी और मुख्यमंत्री के प्रति उनका बदला हुआ रुख राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहा है।

बेंगलुरु में ‘मामा’ का जलवा: कांग्रेस विधायकों ने घेरा, ऑटोग्राफ की मची होड़

केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में कृषि और सहकारिता के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने बेंगलुरु पहुंचे शिवराज सिंह चौहान का वहां एक अलग ही रूप देखने को मिला। अमूमन भाजपा और कांग्रेस के बीच दिखने वाली वैचारिक तल्खी इस कार्यक्रम में पूरी तरह गायब नजर आई।

  • कांग्रेसी विधायकों का जमावड़ा: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के कई स्थानीय विधायक और वरिष्ठ नेता पूरे कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान के आसपास ही मंडराते नजर आए।
  • साउथ में बढ़ा क्रेज: ‘लाडली बहना योजना’ और कृषि क्षेत्र में मध्य प्रदेश को लगातार मिले कृषि कर्मण पुरस्कारों की गूंज अब दक्षिण के राज्यों में भी सुनाई दे रही है। कांग्रेसी विधायकों ने न केवल शिवराज के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, बल्कि कुछ युवा विधायकों ने डायरी आगे बढ़ाकर उनका ऑटोग्राफ भी लिया। दक्षिण के नेताओं का कहना है कि वे अपने राज्यों में महिला सशक्तिकरण और किसान कल्याण के ‘शिवराज मॉडल’ को समझने के लिए उत्सुक हैं।

चिट्ठी कांड के बाद नरम पड़े कैलाश विजयवर्गीय, बदले-बदले दिखे सुर

इस बीच, मध्य प्रदेश की आंतरिक राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव इंदौर के कद्दावर नेता और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के व्यवहार में देखने को मिल रहा है। कुछ दिनों पहले नई दिल्ली में आलाकमान को भेजी गई एक ‘गोपनीय चिट्ठी’ लीक होने के बाद प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया था, जिसमें प्रशासनिक नियुक्तियों और सरकार के कामकाज को लेकर कुछ सवाल उठाए जाने की चर्चा थी।

कैबिनेट बैठक में दिखा बदला रूप:

इस तथाकथित चिट्ठी कांड के बाद कल मंत्रालय में आयोजित हुई कैबिनेट की अहम बैठक में विजयवर्गीय के सुर पूरी तरह बदले नजर आए। जो विजयवर्गीय अक्सर अपने बेबाक और आक्रामक बयानों के लिए जाने जाते हैं, वे बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के हर प्रस्ताव पर बेहद सहजता से हामी भरते दिखे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली से मिले सख्त इनपुट और संगठन के कड़े रुख के बाद विजयवर्गीय ने फिलहाल बैकफुट पर जाना ही बेहतर समझा है।

बदली रणनीति: क्या है इस नए घटनाक्रम के सियासी मायने?

नेता और क्षेत्रवर्तमान राजनीतिक स्थितिसंभावित भविष्य के मायने
शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय कृषि मंत्री (बेंगलुरु दौरा)ग्लोबल साउथ और गैर-बीजेपी शासित राज्यों में पार्टी के लिए स्वीकार्यता बढ़ाना।
कैलाश विजयवर्गीयकैबिनेट मंत्री, मप्र सरकारदिल्ली की नसीहत के बाद प्रदेश संगठन और मुख्यमंत्री के साथ समन्वय पर ध्यान।

सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान ने साफ कर दिया है कि आगामी संगठनात्मक चुनावों और निगम-मंडलों की नियुक्तियों से ठीक पहले पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या समानांतर पावर सेंटर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि विजयवर्गीय अब सरकार के भीतर समन्वय बनाने पर पूरा जोर दे रहे हैं। वहीं, शिवराज का दक्षिण में बढ़ता यह क्रेज आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए दक्षिण के राज्यों में संजीवनी का काम कर सकता है।

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