स्थान: भोपाल
दिनांक: 2 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, भोपाल:
मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में वीआईपी ड्यूटी और अधिकारियों के लिए किराए पर ली जाने वाली गाड़ियों (Rented Cars) के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। एक सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी ने विभाग की लॉगबुक और फ्यूल बिलिंग व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार, विभाग की एक रेंटेड लग्जरी कार में उसकी कुल ईंधन टैंक क्षमता (Fuel Tank Capacity) से भी अधिक डीजल भरवाए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस गाड़ी की ईंधन क्षमता महज 50 लीटर है, उसकी लॉगबुक में एक ही बार में 52.5 लीटर फ्यूल भराए जाने का बिल पास कराया गया। यह गाड़ी किसी छोटे अधिकारी की नहीं, बल्कि तत्कालीन लोक निर्माण विभाग के मंत्री के काफिले और वीआईपी ड्यूटी के लिए अटैच की गई थी।
मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसी लॉगबुक: एक दिन में 600 किमी दौड़ने का दावा
आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा निकाली गई विभाग की आधिकारिक लॉगबुक और पेट्रोल पंपों के बिलों का मिलान करने पर जो विसंगतियां सामने आई हैं, वे वित्तीय अनियमितताओं की ओर साफ इशारा करती हैं।
- टैंक से ज्यादा तेल: सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, महिंद्रा मराजो (गाड़ी संख्या एमपी 04 ….) को विभाग ने किराए पर लिया था। कंपनी गाइडलाइंस के अनुसार इस गाड़ी के फ्यूल टैंक की क्षमता ठीक 50 लीटर है। लेकिन 14 मार्च के एक बिल में इस गाड़ी में 52.5 लीटर डीजल रीफ्यूलिंग का भुगतान सरकारी खजाने से किया गया।
- दूरी का फर्जीवाड़ा: लॉगबुक के अनुसार, यह गाड़ियां कई बार चौबीस घंटे में 550 से 600 किलोमीटर तक चलने का दावा करती हैं, जबकि उस दौरान गाड़ी के मूवमेंट की कोई ठोस प्रशासनिक वजह या टूर डायरी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।
- मंत्री और करीबियों को रेवड़ी: तत्कालीन मंत्री और उनके स्टाफ के उपयोग के लिए अनुबंध पर ली गई इन गाड़ियों के भुगतान में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। अधिकारियों ने बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के हर महीने लाखों रुपये के किराए और फ्यूल बिलों को आंख मूंदकर मंजूरी दे दी।
सरकारी खजाने को हर महीने लग रहा है लाखों का चूना
पीडब्ल्यूडी के नियमों के मुताबिक, किसी भी रेंटेड या सरकारी गाड़ी में ईंधन भराने के बाद बकायदा पेट्रोल पंप की रसीद, गाड़ी के ओडोमीटर (रीडिंग) का मिलान और संबंधित नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका:
आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया, “यह सीधे तौर पर कागजी हेरफेर और सरकारी धन का गबन है। जब गाड़ी की क्षमता ही 50 लीटर है, तो पंप से 52 लीटर का बिल कैसे जनरेट हुआ और विभाग के एकाउंट्स सेक्शन ने इसे पास कैसे किया? ऐसे एक नहीं, बल्कि दर्जनों गाड़ियों के बिल हैं जहां क्षमता से अधिक या टैंक फुल होने के बावजूद अगले ही दिन फिर से फुल टैंक का बिल लगाया गया है। आशंका है कि विभाग के कुछ बाबू, अफसर और ट्रैवल एजेंसी मालिक मिलकर यह सिंडिकेट चला रहे हैं।”
उच्च स्तरीय जांच की मांग, इंजीनियर-इन-चीफ ने दिए निर्देश
RTI के जरिए यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होने के बाद लोक निर्माण विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ (E-in-C) ने तत्काल प्रभाव से वित्तीय संवितरण अधिकारी और संबंधित संभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) से पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि ट्रैवल एजेंसी और संबंधित लॉगबुक प्रभारी दोषी पाए जाते हैं, तो न केवल एजेंसी का टेंडर निरस्त कर भुगतान रोका जाएगा, बल्कि धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई जाएगी। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार से तत्कालीन मंत्री के कार्यकाल के दौरान किराए पर ली गई सभी गाड़ियों के ऑडिट कराने की मांग की है।
पीडब्ल्यूडी रेंटेड कार घोटाले की जांच रिपोर्ट, दोषी अधिकारियों पर होने वाले एक्शन और भोपाल के प्रशासनिक समाचारों की हर पल-पल की लाइव ब्रेकिंग न्यूज़
