स्थान: नई दिल्ली
दिनांक: 29 जून, 2026
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली:
संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली के सत्ता गलियारों (लुटियंस जोन) में भारी राजनीतिक हलचल देखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक बड़े और व्यापक फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की अटकलें तेज हो गई हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात और भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे (‘टीम नितिन नबीन’) के गठन की तैयारियों ने इन चर्चाओं को हवा दे दी है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का मकसद केवल राजनीतिक तालमेल बिठाना नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज को ‘मिड-टर्म रीसेट’ (Mid-term Reset) देना है। इस बड़े बदलाव के तहत 6 मौजूदा मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है, जबकि 9 नए चेहरों को मंत्रियों के रूप में इंडक्ट (शामिल) किया जा सकता है।
किन 6 मंत्रियों पर गिर सकती है गाज? ये हैं बड़ी वजहें
सूत्रों के मुताबिक, जिन मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है या जिन्हें संगठन में वापस भेजा जा सकता है, उनके पीछे विभागों का लचर प्रदर्शन और हालिया विवाद मुख्य वजह हैं:
- धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री): हाल ही में नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक विवाद और सीबीएसई डिजिटल मार्किंग सिस्टम में आई गड़बड़ियों के चलते शिक्षा मंत्रालय लगातार विपक्ष और छात्रों के निशाने पर रहा है। माना जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल के तहत उन्हें पद से हटाया जा सकता है।
- हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्री): पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों और पार्टी के नए सिखों को आगे बढ़ाने की रणनीति के तहत उनकी जगह किसी नए चेहरे को मौका दिया जा सकता है।
- संगठन में वापसी वाले चेहरे: एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) से निपटने और राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए 3 से 4 कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को वापस भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
9 नए चेहरों की सुगबुगाहट: यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र पर विशेष फोकस
मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले 9 संभावित नए चेहरों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। इस बार का फोकस परफॉर्मेंस के साथ-साथ क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने पर है:
- शक्तिकांत दास (पूर्व गवर्नर, RBI): दिल्ली के राजनीतिक हलकों में सबसे चौंकाने वाली चर्चा पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें पूर्ण कैबिनेट मंत्री बनाकर देश का नया वित्त मंत्री नियुक्त किया जा सकता है, जबकि मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय जैसी नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
- सहयोगी दलों को तवज्जो: एनडीए (NDA) के घटक दलों को मजबूत करने के लिए बिहार से जदयू (JDU) प्रमुख और महाराष्ट्र से शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे के नामों की भी चर्चा है।
- पंजाब और यूपी को प्रतिनिधित्व: आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पंजाब से राघव चड्ढा (चर्चाओं के अनुसार नए समीकरणों के तहत) या किसी वरिष्ठ सिख चेहरे और उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र से युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देकर क्षेत्रीय असंतोष को दूर करने की कवायद है।
इस बड़े फेरबदल के पीछे की ‘पूरी इनसाइड स्टोरी’
इस फेरबदल के पीछे मोदी सरकार की तीन बड़ी रणनीतियां काम कर रही हैं:
1. परफॉर्मेंस ऑडिट (जवाबदेही तय करना):
प्रधानमंत्री मोदी शुरू से ही ‘मैक्सिमम गवर्नेंस’ के हिमायती रहे हैं। मंत्रियों के पिछले दो साल के कामकाज का एक इंटरनल ऑडिट (आंतरिक समीक्षा) किया गया है। जिन मंत्रालयों की रफ्तार धीमी रही है या जो विवादों में घिरे हैं, उनके नेतृत्व में बदलाव होना तय है।
2. युवाओं को कमान (सांगठनिक ओवरहॉल):
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में पार्टी एक नई युवा टीम तैयार कर रही है। कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजकर और संगठन के सक्रिय चेहरों को सरकार में लाकर ‘युवा और अनुभवी’ नेताओं का एक नया कॉकटेल तैयार किया जा रहा है।
3. आगामी राज्यों के चुनाव और ‘मिशन 2029’:
उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पार्टी अपनी जमीन को और मजबूत करना चाहती है। इन राज्यों के जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को सीधे केंद्रीय कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देकर भाजपा अपनी चुनावी तैयारियों को धार दे रही है।
कैबिनेट सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री की व्यस्त दिनचर्या और मानसून सत्र की तारीखों को देखते हुए इस फेरबदल की अंतिम घोषणा जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में, राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के साथ हो सकती है।
