दिनांक: 25 जून, 2026
राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली:
देश के अलग-अलग हिस्सों से बीते 24 घंटों में तीन ऐसी बेहद अजीबोगरीब और ध्यान खींचने वाली खबरें सामने आई हैं, जो सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इनमें मध्य प्रदेश के एक सरकारी अस्पताल की हैरान करने वाली लापरवाही, इतिहास के पन्नों को लेकर एक भाजपा सांसद का दिलचस्प बयान और रोजगार के मोर्चे पर एक अनोखी प्रशासनिक परीक्षा शामिल है।
1. अस्पताल बना मयखाना: दवा की जगह बेड पर सजी ‘शराब पार्टी’
पहला चौंकाने वाला मामला मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला अस्पताल से सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा और अनुशासन की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज (देवेंद्र यादव) ने अस्पताल के बेड को ही मयखाना बना डाला।
- नर्स ने रंगे हाथों पकड़ा: रात के समय जब ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ वार्ड के राउंड पर निकली, तो उसने देखा कि मरीज अपने अटेंडरों और दोस्तों के साथ पलंग पर बैठकर आराम से खाना खा रहा था और साथ ही कांच के ग्लासों में शराब परोसी जा रही थी।
- जमकर लगी लताड़: नर्स को अचानक सामने देखकर मरीज और उसके साथी ग्लास छुपाने लगे। नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत मोबाइल निकालकर इस करतूत को कैमरे में कैद किया और फटकार लगाते हुए कहा, “हम लोग रात-दिन जागकर, अपनी तबीयत खराब करके यहां आपकी सेवा करते हैं और आप लोग अस्पताल को अपवित्र कर रहे हैं?” वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच और सुरक्षा गार्ड्स पर कार्रवाई की बात कही है।
2. ‘आजादी और सत्ता हस्तांतरण’ पर भाजपा सांसद का तीखा ज्ञान
दूसरी बड़ी सुर्खी राजनीतिक गलियारे से है, जहां देश की आजादी और प्रथम प्रधानमंत्री के चयन के इतिहास को लेकर भाजपा के वरिष्ठ सांसद और प्रखर वक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है।
1946 के चुनाव का दिया हवाला:
एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर इतिहास को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अगस्त 1946 में जब प्रधानमंत्री के नाम के लिए कांग्रेस की प्रांतीय कमेटियों से वोट मांगे गए थे, तब सरदार पटेल को सबसे ज्यादा वोट मिले थे और जवाहरलाल नेहरू जी को शून्य (0) वोट मिला था। इसके बावजूद वे प्रधानमंत्री बन गए। देश की आजादी के समय जब सत्ता हस्तांतरण हो रहा था, तब निष्ठा की शपथ ब्रिटिश क्राउन के प्रति ली गई थी।” सांसद ने सावरकर और राम मंदिर के मुद्दों को जोड़ते हुए कहा कि इतिहास के प्रति ईमानदारी रखना हर नागरिक का कर्तव्य है।
3. 8 पदों पर नौकरी की अनोखी रेस, मैदान में दौड़ी केवल एक ही ‘अकेली खिलाड़ी’
तीसरी और सबसे दिलचस्प खबर रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों के क्षेत्र से है। अमूमन देश में एक सरकारी नौकरी के पद के लिए हजारों युवा लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन यहां पासा पूरी तरह पलट गया। एक विशेष भर्ती परीक्षा के तहत 8 अलग-अलग पदों पर नौकरी की रेस शुरू हुई, लेकिन इस रेस में दौड़ने वाली केवल एक अकेली महिला प्रत्याशी ही बची।
- दिलचस्प मुकाबला: प्रशासनिक नियमों और कठिन योग्यताओं के चलते बाकी सभी आवेदक शुरुआती स्क्रूटनी (दस्तावेज जांच) या तकनीकी मापदंडों में बाहर हो गए। अंततः लिखित और व्यावहारिक परीक्षा के अंतिम चरण तक केवल एक ही योग्य उम्मीदवार पहुंच सकी।
- एकतरफा चयन: चूंकि मुकाबला केवल एक ही उम्मीदवार के इर्द-गिर्द सिमट गया, इसलिए इस ‘अकेली दौड़’ को पार करते ही उनके लिए चयन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। विभाग के अधिकारियों ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि यह अपने आप में एक दुर्लभ वाकया है जहां पदों की संख्या ज्यादा थी और योग्य उम्मीदवार केवल एक।
