दिनांक: 23 जून, 2026
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में दशकों से जारी माओवादी हिंसा को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ‘रिपब्लिक समिट 2026’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दोटूक कहा कि जो लोग आज संसद से लेकर सड़क तक सियासी फायदे के लिए बाबा साहब का संविधान लहरा रहे हैं, जब देश में नक्सली हिंसा अपने चरम पर थी और आदिवासी इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोलियां मार दी जाती थीं, तब इन लोगों के हाथ कांप रहे थे।
पीएम मोदी ने गर्व से घोषणा की कि ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) के संकल्प और सुरक्षा बलों के पूर्ण समर्पण की बदौलत आज देश में माओवादी आतंकवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।
“तब संविधान का नाम लेने पर मार दी जाती थी गोली, तब क्यों चुप थे ये लोग?”
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2014 से पहले के दौर की याद दिलाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“आजकल कुछ लोग लगातार संविधान की प्रति लहराते रहते हैं। लेकिन मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूँ कि जब वे सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में हमारे गरीब आदिवासियों को संविधान का नाम लेने पर भी गोली मार दी जाती थी, तब ये लोग चुप बैठे थे। उस दर्दनाक स्थिति से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था। तब उनके हाथों में संविधान नहीं दिखता था, बल्कि उनके हाथ कांप रहे थे।”
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, पीएम मोदी का यह सीधा इशारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर था, जो अक्सर रैलियों और संसद में शपथ ग्रहण के दौरान संविधान की प्रति हाथ में लिए नजर आते हैं।
आंकड़ों से घेरा: 2004 से 2014 के बीच 17 हजार वारदातें और 7 हजार मौतें
प्रधानमंत्री ने देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य को बदलते हुए यूपीए शासनकाल और वर्तमान एनडीए सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट किया:
- यूपीए काल की भयावहता: पीएम मोदी ने बताया कि साल 2004 से 2014 के बीच देश में माओवादी आतंकवाद के कारण 17,000 से अधिक हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 7,000 बेकसूर नागरिकों और जवानों ने अपनी जान गंवाई।
- 2014 के बाद का संकल्प: “2014 के बाद हम बिना शोर मचाए ‘राष्ट्र प्रथम’ के भाव से आगे बढ़े। हमने संकल्प लिया कि इस नासूर को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। आज नतीजा सबके सामने है।”
एक अनोखा वाकया: ‘इनामी नक्सली की माँ के पास पहली बार पहुँचा राशन कार्ड’
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने एक बेहद भावुक और हैरान करने वाला वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया, “एक नामी नक्सली कमांडर, जिस पर करोड़ों रुपये का इनाम था, उसकी माँ के पास हमारी सरकार पहली बार राशन कार्ड लेकर पहुँची। वह बेटा अपना खौफ और आतंकवाद बनाए रखने के लिए अपनी ही माँ को राशन कार्ड तक नहीं लेने देता था। पिछली सरकारें ऐसी घटनाओं पर चुप बैठी थीं, लेकिन हमने जनता का दिल जीतकर विकास को हथियार बनाया।”
‘बैकवर्ड’ से ‘एस्पिरेशनल’ जिलों का सफर: 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने नक्सल प्रभावित इलाकों को सिर्फ ‘पिछड़ा क्षेत्र’ (Backward Regions) घोषित कर अपने हाल पर छोड़ दिया था।
- सोच में बदलाव: हमारी सरकार ने चुनौती स्वीकार की और इन क्षेत्रों का नाम बदलकर ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स और ब्लॉक्स’ (आकांक्षी जिले) किया।
- विकास की नई राह: पिछले 12 वर्षों में इन नक्सल प्रभावित इलाकों में 12,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कें बनाई गईं, स्कूल और जन औषधि केंद्र खोले गए।
- गरीबी उन्मूलन: इसी चौतरफा विकास का परिणाम है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जिसमें इन आकांक्षी जिलों की बहुत बड़ी भूमिका रही है।
अंत में पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत न केवल एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक विश्वसनीय वैश्विक शक्ति बन चुका है, जो अगले 1000 वर्षों के भविष्य की पटकथा लिख रहा है।
