ईरान की अमेरिका को सख्त चेतावनी: ‘अगर शांति समझौता टूटा तो जिम्मेदार वॉशिंगटन होगा’; लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करने की मांग, हिजबुल्लाह बोला—’इजराइल का कब्जा कतई मंजूर नहीं’

दिनांक: 20 जून, 2026

अंतरराष्ट्रीय डेस्क, तेहरान:

अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (West Asia) में जारी चार महीने के युद्ध को समाप्त करने के लिए हस्ताक्षरित हुए ‘इस्लामाबाद शांति समझौते’ (MoU) के महज दो दिनों के भीतर ही भारी तनाव पैदा हो गया है। लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच शुक्रवार को हुए भीषण हवाई हमलों और जमीनी संघर्ष के बाद स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की कूटनीतिक बैठक टल गई है।

इस बीच, ईरान सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि यह ऐतिहासिक शांति समझौता टूटता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी। वहीं, लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे अपनी जमीन पर इजराइल का कोई भी अवैध कब्जा मंजूर नहीं है।

ईरान की दोटूक—लेबनान फ्रंट पर इजराइली हमलों को रोके अमेरिका

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बुधवार को हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय समझौते (Islamabad MoU) के तहत सभी मोर्चों, विशेष रूप से लेबनान में सैन्य कार्रवाइयां तुरंत और स्थायी रूप से बंद होनी चाहिए।

ईरान ने अमेरिका पर दबाव बनाते हुए कहा:

  • समझौते की शर्त: समझौते की मूल शर्त यह है कि अमेरिका अपने सहयोगी इजराइल को नियंत्रित करे और लेबनान पर हो रहे हमलों को पूरी तरह रुकवाए।
  • बढ़ता अविश्वास: ईरान ने आरोप लगाया कि एक तरफ अमेरिका शांति की बात कर रहा है और दूसरी तरफ इजराइल लेबनान में बमबारी कर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। अगर वॉशिंगटन ने इजराइल को नहीं रोका, तो यह समझौता इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा।

स्विट्जरलैंड वार्ता टली; लेबनान में फिर हुआ सीजफायर

शुक्रवार को लेबनान में इजराइली बमबारी में दो बच्चों सहित कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई, जिसके विरोध में ईरानी राजनयिकों ने स्विट्जरलैंड की यात्रा टाल दी। हालांकि, युद्ध को पूरी तरह बिखरने से बचाने के लिए अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता से शुक्रवार शाम 4 बजे से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच फिर से एक नए संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमति बन गई है।

लेकिन इस नाजुक शांति के बीच हिजबुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व ने बयान जारी कर इजराइल को ललकारा है। हिजबुल्लाह ने कहा, “हम अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे। दक्षिणी लेबनान की सरजमीं पर इजराइली सेना की मौजूदगी या किसी भी तरह का कब्जा हमें मंजूर नहीं है। हमारे हथियार तभी शांत रहेंगे जब इजराइल हमारी सीमा से पूरी तरह बाहर जाएगा।”

क्या है ‘इस्लामाबाद समझौता’ और क्यों फंसा है पेंच?

इसी सप्ताह 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डिजिटल माध्यम से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

  1. शर्तें: इसके तहत ईरान को तत्काल प्रभाव से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को जहाजों के लिए खोलना था (जो उसने खोल दिया है)। बदले में अमेरिका को ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाने थे।
  2. 60 दिनों की समयसीमा: दोनों पक्षों को अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हमेशा के लिए हटाने पर अंतिम सहमति बनानी है।

पेंच कहाँ है?: इस समझौते में इजराइल सीधे तौर पर शामिल नहीं था। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस डील को अमेरिका की कमजोरी मान रहे हैं, वहीं ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान और हिजबुल्लाह पर मंडराता इजराइली खतरा खत्म नहीं होता, तब तक परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं होगा। मध्य पूर्व की यह नाजुक शांति अब पूरी तरह अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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