अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: महासचिव चंपत राय पर एक्शन लगभग तय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा भी हटाए जा सकते हैं; SIT आज लखनऊ लौटकर सीएम योगी को सौंपेगी अपनी रिपोर्ट

दिनांक: 20 जून, 2026

विशेष संवाददाता, अयोध्या/लखनऊ:

अयोध्या के भव्य राम मंदिर की दान पेटी से करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन के मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) आज अपनी विस्तृत और गोपनीय जांच रिपोर्ट लेकर लखनऊ लौट रही है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जाएगा.

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की इस रिपोर्ट के आधार पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें उन्हें उनके पदों से हटाया जाना भी शामिल है.

सीएम योगी के कड़े तेवर: ‘चोर कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा’

शुक्रवार को अयोध्या के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि राम मंदिर से चंदा चोरी करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ महापाप है.

सीएम योगी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा:

“अपराधी चाहे कितना भी बड़ा हो या किसी भी पद पर हो, वह बचेगा नहीं, उसका पूरा हिसाब होगा. ट्रस्ट के ही अनुरोध पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है जो दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. राम भक्तों की भावनाओं को आहत करने वाले हर एक दोषी को सजा मिलना सुनिश्चित है. जनता बस 15 दिन का थोड़ा सब्र रखे, पूरा सच सामने आ जाएगा.”

राजनीतिक हलकों में सीएम योगी के इस बयान को सीधे तौर पर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के लिए एक कड़ा अल्टीमेटम माना जा रहा है.

चंपत राय से बनाई दूरी; प्रोटोकॉल से किए गए बाहर

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात कल मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे के दौरान देखने को मिली. अमूमन जब भी सीएम योगी अयोध्या आते हैं, तो चंपत राय हमेशा उनके साथ मंच और कार्यक्रमों में अग्रिम पंक्ति में नजर आते थे. लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने प्रोटोकॉल के तहत स्पष्ट निर्देश जारी कर चंपत राय को मुख्यमंत्री के मंच और कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर रखा. उनके स्थान पर ट्रस्ट के किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजने के लिए कहा गया था, जिसे राजनीतिक गलियारों में ‘कोल्ड शोल्डर’ (किनारे करना) माना जा रहा है.

SIT की मैराथन पूछताछ में सामने आईं कई गंभीर खामियां

लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम पिछले कई दिनों से अयोध्या में डेरा डाले हुए है. टीम ने चंपत राय, मंदिर प्रशासक गोपाल राव और ट्रस्टी अनिल मिश्रा से बंद कमरे में घंटों मैराथन पूछताछ की है.

जांच के दौरान सामने आई मुख्य खामियां इस प्रकार हैं:

  • निगरानी में 90% चूक: राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी माना है कि चढ़ावे की गिनती और उसकी सुरक्षा के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और ट्रस्ट के बीच जो कड़े गाइडलाइंस तय थे, जमीनी स्तर पर उसका 10% भी पालन नहीं किया गया.
  • CCTV कैमरे जानबूझकर किए गए बंद: शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जब-जब दानपात्रों को खोला जाता था और नोटों के बंडल गिने जाते थे, तब-तब बीच-बीच में सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर ऑफ (बंद) कर दिए जाते थे और वहां तैनात सुरक्षाकर्मी आंखें फेर लेते थे.
  • जमीन खरीद के पुराने विवाद: इसी बीच विपक्षी दलों, विशेषकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि चंपत राय ने 9 करोड़ की जमीन को करीब 55 करोड़ रुपये में खरीदकर चंदे की खुली डकैती की है, जिसके आधिकारिक दस्तावेज वे आज एसआईटी को सौंपेंगे.

आज शाम तक सीएम योगी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट; बड़े फैसले की उम्मीद

एसआईटी की टीम आज दोपहर बाद लखनऊ के लिए रवाना होगी और शाम तक मुख्यमंत्री आवास पर सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी.

सूत्रों का दावा है कि रिपोर्ट में शीर्ष स्तर पर घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है. राम मंदिर के करोड़ों भक्तों की नाराजगी और विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच, भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से चंपत राय और अनिल मिश्रा को पद से हटाकर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और पारदर्शी फेरबदल किया जाना लगभग तय है.

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