दिनांक: 18 जून, 2026
स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
धर्मनगरी हरिद्वार में बुधवार, 17 जून को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का गवाह बना, जब विश्व के सबसे विशाल पारद (पारे से निर्मित) शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे स्थित ‘श्री साईं शिव गंगा धाम’ में स्थापित इस ‘पारद ध्यान लिंगम’ का वजन 5,210 किलोग्राम है।
शिवलिंग की प्रमुख विशेषताएं
इस शिवलिंग का निर्माण प्राचीन भारतीय रसायन शास्त्र और आधुनिक विज्ञान के अनूठे मेल का प्रतीक माना जा रहा है।
- वजन और संरचना: शिवलिंग का कुल वजन 5,210 किलोग्राम है, जिसमें 3,333 किलोग्राम शुद्ध पारे (Mercury) का उपयोग किया गया है।
- ऊंचाई: यह शिवलिंग 4.5 फीट ऊंचा और लगभग 1.5 फीट चौड़ा है।
- निर्माण प्रक्रिया: इसके निर्माण में 10 वर्षों का लंबा समय लगा। पुणे के ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी के मार्गदर्शन में इसे तैयार किया गया है। इसमें पारे के साथ चांदी, सोना और 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क का प्रयोग किया गया है।
- वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार: इसे बनाने में हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है। इसका निर्माण नाथ योगी परंपरा और प्राचीन पारद विज्ञान (Alchemy) के सिद्धांतों पर आधारित है।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह
प्राण प्रतिष्ठा समारोह गुरु गोरक्षनाथ महाराज की परंपरा और गिरनार के पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में भारत के सुपर कंप्यूटर के जनक पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना है।
ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार, यह शिवलिंग केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि ध्यान और आत्म-साक्षात्कार के लिए एक ऊर्जावान माध्यम है। समारोह में देश भर के प्रमुख संत और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
दार्शनिकों के लिए आकर्षण
यह विशाल शिवलिंग अब भक्तों के दर्शन के लिए ‘श्री साईं शिव गंगा धाम’ (भद्राबाद टोल प्लाजा के निकट) में उपलब्ध है। इसे ‘इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड’ और ‘एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में भी जगह मिल चुकी है, और इसे ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में शामिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
