क्या फीफा विश्व कप 2026 बनेगा इतिहास का सबसे प्रदूषणकारी टूर्नामेंट?

09 जून 2026

48 टीमें, 104 मैच और तीन देशों में आयोजन से बढ़ीं पर्यावरणीय चिंताएं

न्यूयॉर्क/मेक्सिको सिटी/टोरंटो। दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल महाकुंभ, FIFA World Cup 2026, को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर यह टूर्नामेंट दर्शकों, राजस्व और भागीदारी के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा विश्व कप बनने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह इतिहास का सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाला फुटबॉल विश्व कप साबित हो सकता है।

नई जलवायु रिपोर्टों के अनुसार विश्व कप 2026 से कम से कम 9 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (CO2) उत्सर्जन होने का अनुमान है। कुछ व्यापक आकलनों में यह आंकड़ा 15 मिलियन टन CO2 तक पहुंच सकता है। यह 2010 से 2022 के बीच आयोजित विश्व कपों के औसत उत्सर्जन से लगभग दोगुना माना जा रहा है।

टूर्नामेंट का विस्तार बना सबसे बड़ी वजह

FIFA World Cup 2026 पहली बार 48 टीमों के साथ खेला जाएगा। टूर्नामेंट में कुल 104 मैच होंगे, जो पिछले संस्करणों के मुकाबले लगभग 63 प्रतिशत अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक टीमों, अधिक मैचों और अधिक दर्शकों की वजह से ऊर्जा खपत तथा यात्रा संबंधी उत्सर्जन में भारी बढ़ोतरी होगी।

इस बार विश्व कप का आयोजन तीन देशों—United States, Canada और Mexico—में किया जा रहा है। मैच 16 अलग-अलग शहरों में खेले जाएंगे, जिनके बीच हजारों किलोमीटर की दूरी है। इससे खिलाड़ियों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और लाखों प्रशंसकों को लगातार हवाई यात्रा करनी पड़ेगी।

हवाई यात्रा बनेगी सबसे बड़ा प्रदूषण स्रोत

रिपोर्टों के अनुसार टूर्नामेंट से होने वाले कुल उत्सर्जन का सबसे बड़ा हिस्सा हवाई यात्रा से आएगा। अनुमान है कि केवल विमान यात्राओं से ही लगभग 7.7 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जित हो सकती है। एक अन्य अध्ययन के मुताबिक कुल उत्सर्जन का करीब 87 प्रतिशत हिस्सा दर्शकों की यात्रा से उत्पन्न होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी अमेरिका में फैले विशाल भौगोलिक क्षेत्र के कारण रेल या अन्य कम-कार्बन परिवहन विकल्प सीमित हैं, जिससे विमान यात्रा लगभग अनिवार्य हो जाती है।

पर्यावरण संगठनों ने उठाए सवाल

जलवायु वैज्ञानिकों और पर्यावरण समूहों ने FIFA की आयोजन रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि विश्व कप का लगातार विस्तार खेल जगत के कार्बन फुटप्रिंट को बढ़ा रहा है। कुछ अध्ययनों में दावा किया गया है कि 2026 विश्व कप पिछले संस्करणों की तुलना में लगभग 92 प्रतिशत अधिक उत्सर्जन पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खेल आयोजनों को अब केवल आर्थिक सफलता या दर्शक संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उनके पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर भी आंका जाना चाहिए।

FIFA का क्या कहना है?

FIFA ने हाल के वर्षों में अपने स्थिरता (Sustainability) कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है और 2030 तक उत्सर्जन में 50 प्रतिशत कटौती तथा 2040 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजित टूर्नामेंट में केवल कार्बन ऑफसेट या हरित अभियानों से वास्तविक उत्सर्जन की भरपाई करना कठिन होगा।

खेल बनाम जलवायु की बहस

फुटबॉल प्रेमियों के लिए विश्व कप 2026 उत्साह का सबसे बड़ा मंच होगा, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ इसे जलवायु संकट के दौर में खेल आयोजनों के भविष्य की परीक्षा भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वैश्विक खेल संस्थाएं आयोजन मॉडल में बदलाव नहीं करतीं, तो बड़े टूर्नामेंट जलवायु परिवर्तन की समस्या को और गंभीर बना सकते हैं।

निष्कर्ष

अंतिम उत्सर्जन आंकड़े टूर्नामेंट के समापन के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन मौजूदा रिपोर्टें संकेत देती हैं कि FIFA World Cup 2026 अब तक का सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाला फुटबॉल विश्व कप बन सकता है। तीन देशों में फैला आयोजन, रिकॉर्ड संख्या में मैच और विशाल हवाई यात्रा नेटवर्क इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अभूतपूर्व चुनौती बना रहे हैं।

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