पुराने वर्ल्ड ऑर्डर का ‘The End’ और नई वैश्विक व्यवस्था का उदय

 दावोस | 22 जनवरी 2026

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इस बार चर्चा का केंद्र केवल अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि अमेरिका के गिरते प्रभाव और सहयोगियों के विद्रोह की आवाजें रहीं। कनाडा के प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं ने साफ कर दिया है कि अब दुनिया अमेरिका के ‘एकतरफा’ फैसलों के भरोसे नहीं चलेगी।

1. कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का सख्त रुख: “अमेरिकी दबदबा अब एक भ्रम”

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बेहद कड़ा आकलन पेश किया। उन्होंने कहा:

  • व्यवस्था का टूटना: “हम किसी बदलाव (Transition) के दौर में नहीं, बल्कि एक गहरी दरार (Rupture) के दौर में हैं। अमेरिकी नेतृत्व वाला वैश्विक नियम-आधारित सिस्टम अब प्रभावी रूप से खत्म हो चुका है।”
  • पुराना दौर वापस नहीं आएगा: उन्होंने स्पष्ट किया कि जो देश पुरानी व्यवस्था के लौटने का इंतजार कर रहे हैं, वे गलतफहमी में हैं।
  • हथियार बनती अर्थव्यवस्था: कार्नी ने आरोप लगाया कि बड़ी ताकतें (संकेत अमेरिका की ओर) अब आर्थिक एकीकरण और व्यापारिक टैरिफ को दबाव बनाने के औजार (Weapon) की तरह इस्तेमाल कर रही हैं।

2. यूरोप ने दिखाया आईना: “सम्मान धमकियों से बड़ा है”

यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका (विशेषकर राष्ट्रपति ट्रंप) की नीतियों को चुनौती दी:

  • ग्रीनलैंड और टैरिफ विवाद: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को ‘खरीदने’ की कोशिश और यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी ने आग में घी का काम किया है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता: यूरोप ने अब अमेरिका पर सुरक्षा और व्यापार के लिए निर्भर रहने के बजाय अपनी ‘स्वतंत्रता’ (Strategic Autonomy) बनाने पर जोर दिया है।
  • असीमित क्षमता: यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी कि उनके पास पूंजी, नवाचार और कौशल की कमी नहीं है, और वे अमेरिका के बिना भी वैश्विक मंच पर प्रभावी रह सकते हैं।

3. नया वर्ल्ड ऑर्डर: क्या बदलेगा?

इस ‘बगावत’ के बाद भविष्य की राजनीति में ये 3 बड़े बदलाव दिख सकते हैं:

  1. मल्टी-पोलर वर्ल्ड (बहु-ध्रुवीय दुनिया): अब दुनिया केवल वाशिंगटन के इशारों पर नहीं नाचेगी। कनाडा, यूरोप और भारत जैसे देश ‘मिडल पावर्स’ के रूप में अपनी स्वतंत्र नीतियां बनाएंगे।
  2. क्षेत्रीय गठबंधन: वैश्विक समझौतों के बजाय देश अब द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (जैसे EU-Mercosur deal) को प्राथमिकता देंगे।
  3. सुरक्षा पर आत्मनिर्भरता: यूरोपीय देशों ने अपना रक्षा बजट बढ़ाने और नाटो (NATO) से इतर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के संकेत दिए हैं।

निष्कर्ष

दावोस 2026 का संदेश साफ है—द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी अमेरिका-केंद्रित व्यवस्था अब इतिहास बन रही है। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने उनके सबसे करीबी सहयोगियों को भी नया रास्ता तलाशने पर मजबूर कर दिया है।