असम चुनाव से पहले बयानबाजी तेज: पवन खेड़ा के आरोप पर सहयोगी दल की नसीहत, सियासी विवाद गहराया

गुवाहाटी। 08 अप्रैल 2026

असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार थमने से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। अब इस विवाद में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के एक नेता की भी एंट्री हो गई है, जिन्होंने खेड़ा के बयान पर आपत्ति जताई है।

शिवसेना (UBT) के नेता ने कहा कि पवन खेड़ा को इस तरह के व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाने चाहिए थे। उनका मानना है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए, न कि निजी जीवन से जुड़े विवादों को उठाना चाहिए।

दरअसल, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा के पासपोर्ट हैं, साथ ही विदेशों में संपत्तियां भी हैं, जिनका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इन आरोपों के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।

भाजपा की ओर से इन आरोपों को बेबुनियाद बताया गया और कांग्रेस पर चुनावी माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया गया। वहीं कांग्रेस ने अपने आरोपों को सही ठहराते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां अक्सर मुद्दों से ध्यान भटकाती हैं। ऐसे में सहयोगी दलों की ओर से आई यह नसीहत कांग्रेस के भीतर भी रणनीति को लेकर मतभेदों की ओर इशारा करती है।

चुनाव प्रचार भले ही थम चुका हो, लेकिन इस तरह के विवादों का असर मतदान पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि मतदाता इन आरोप-प्रत्यारोप को कितना महत्व देते हैं और किस आधार पर अपना निर्णय करते हैं।