06 मार्च 2026
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबरों के बीच राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि यदि नीतीश कुमार सक्रिय राज्य की राजनीति से हटते हैं या नई भूमिका में जाते हैं, तो बिहार में सत्ता संतुलन का नया फार्मूला सामने आ सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी और डिप्टी सीएम पद किस दल के खाते में जाएगा।
सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच इस मुद्दे पर अंदरखाने चर्चा शुरू हो चुकी है। अगर मुख्यमंत्री पद बीजेपी को मिलता है तो जेडीयू को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे गठबंधन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। हालांकि अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बीजेपी के भीतर मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व के बीच इस विषय पर मंथन चल रहा है। पार्टी यह भी देख रही है कि ऐसा चेहरा सामने आए जो संगठन और सरकार दोनों को मजबूती दे सके और आगामी चुनावों में पार्टी के लिए लाभकारी साबित हो।
दूसरी ओर जेडीयू भी अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में है। यदि बीजेपी मुख्यमंत्री पद पर दावा करती है तो जेडीयू डिप्टी सीएम के साथ-साथ सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग कर सकती है। इससे गठबंधन में उसकी भूमिका और प्रभाव बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का दिल्ली जाना बिहार की राजनीति के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। पिछले दो दशकों से वे राज्य की राजनीति का केंद्र रहे हैं और उनके बाद नेतृत्व का सवाल स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण बन जाता है। ऐसे में बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दल सोच-समझकर फैसला लेना चाहेंगे, ताकि गठबंधन की मजबूती बनी रहे।
फिलहाल बिहार में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है। आने वाले दिनों में गठबंधन दलों की बैठकों और केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि राज्य की सत्ता की कमान किसके हाथों में होगी और नया राजनीतिक समीकरण कैसा होगा।

