नई दिल्ली/पटना । 10 अप्रैल 2026
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वरिष्ठ पत्रकार और राजनेता हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। उनके मनोनयन के साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि उन्हें एक बार फिर राज्यसभा का उपसभापति बनाया जा सकता है। 69 वर्षीय हरिवंश का कार्यकाल अब वर्ष 2032 तक रहेगा।
यह सीट पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई थी। उसी रिक्त पद को भरने के लिए हरिवंश को चुना गया है। वे पहले भी राज्यसभा के उपसभापति के रूप में कार्य कर चुके हैं और संसदीय कार्यवाही में उनका लंबा अनुभव रहा है।
संविधान के अनुसार, राज्यसभा में कुल 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। इनका चयन कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान के आधार पर होता है। हरिवंश को भी उनके पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में योगदान के चलते यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दरअसल, हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उन्हें राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए उन्हें मनोनीत किया, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दोपहर 12:30 बजे राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने वाले हैं। हालांकि, आमतौर पर मुख्यमंत्री का राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेना असामान्य माना जाता है, जिससे इस घटनाक्रम ने और ध्यान खींचा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरिवंश का मनोनयन न केवल संसदीय अनुभव को मजबूती देगा, बल्कि राज्यसभा के संचालन में स्थिरता भी लाएगा। साथ ही, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उन्हें फिर से उपसभापति की जिम्मेदारी सौंपी जाती है या नहीं।
