नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026

असम में सियासी घमासान, सीएम हिमंता पर SIT रिपोर्ट दबाने और परिवार को घसीटने का आरोप

गुवाहाटी।
असम की राजनीति में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर लगाए गए पाकिस्तान से कथित संबंधों के आरोपों ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री “इतना नीचे गिर गए हैं” कि अब उन्होंने राजनीति में उनके परिवार और बच्चों को भी घसीटना शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री के आरोपों से बढ़ा विवाद

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल के दिनों में दावा किया था कि गौरव गोगोई और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के पाकिस्तान से कथित संबंध रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में गठित SIT (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट में अहम जानकारियां सामने आई हैं और मामले को आगे केंद्रीय एजेंसियों तक ले जाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला” बताया।

गौरव गोगोई का कड़ा जवाब

इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसका मकसद विपक्ष की आवाज़ को दबाना है।
गोगोई ने आरोप लगाया कि सीएम हिमंता ने जानबूझकर SIT रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि उसमें ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे उन्हें बदनाम किया जा सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी की पाकिस्तान यात्रा पूरी तरह काम से जुड़ी और कानूनी थी, जिसे अब राजनीतिक विवाद का रूप दिया जा रहा है। गोगोई ने कहा कि परिवार और बच्चों को राजनीति में घसीटना “अस्वीकार्य और अनैतिक” है।

SIT रिपोर्ट को लेकर सवाल

गोगोई ने सवाल उठाया कि अगर SIT रिपोर्ट में वाकई कोई गंभीर बात थी, तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर रिपोर्ट को दबाने और इसे चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरा मुद्दा असम सरकार की नाकामियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

इस विवाद के बाद असम में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान को “झूठा, आधारहीन और घृणास्पद राजनीति” करार दिया है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि गौरव गोगोई को आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

चुनावी माहौल और बढ़ता तनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला और तूल पकड़ सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा, परिवार की निजता और राजनीतिक नैतिकता जैसे मुद्दों ने इस विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।

निष्कर्ष

असम की राजनीति में यह टकराव अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच विश्वास की लड़ाई बन गया है। एक ओर मुख्यमंत्री गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है। आने वाले दिनों में SIT रिपोर्ट और इस मामले पर केंद्र सरकार की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।