17 मार्च 2026
लोकसभा में निलंबित आठ विपक्षी सांसदों की सदस्यता बहाल करने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च को स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद 17 मार्च को निलंबन वापस लेने की संभावना जताई गई।
बैठक में बनी सहमति
फ्लोर लीडर्स की बैठक में सभी दलों ने इस बात पर सहमति जताई कि सांसद सदन की कार्यवाही के दौरान अनुशासन बनाए रखेंगे।
इसमें यह भी तय हुआ कि:
- कोई सदस्य वेल में जाकर विरोध नहीं करेगा
- स्पीकर के पोडियम पर कागज नहीं फेंके जाएंगे
- महासचिव की डेस्क पर प्रदर्शन नहीं किया जाएगा
बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता
बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल, के. सुरेश, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, टीएमसी की सताब्दी रॉय और एनसीपी की सुप्रिया सुले शामिल रहीं।
इसके अलावा एनडीए की ओर से राजीव रंजन सिंह और श्रीकांत शिंदे भी बैठक में मौजूद थे।
क्यों हुआ था निलंबन
3 फरवरी 2026 को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान अनुशासनहीन व्यवहार के चलते 7 कांग्रेस सांसदों और 1 CPI(M) सांसद को निलंबित किया गया था।
इनमें गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, किरण कुमार रेड्डी, अमरिंदर सिंह राजा वॉरिंग, मणिकम टैगोर, प्रशांत पाडोले, डीन कुरियाकोस और एस. वेंकटेशन शामिल हैं।
सदन में आचरण को लेकर सख्ती
लोकसभा सचिवालय ने सांसदों को निर्देश दिया है कि वे सदन में पोस्टर, बैनर और प्लेकार्ड लेकर न आएं।
साथ ही यह भी सामने आया है कि कुछ पोस्टरों में आपत्तिजनक और AI-जनरेटेड सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिस पर भी रोक लगाने को कहा गया है।
स्पीकर ने जताई चिंता
स्पीकर ओम बिरला ने हाल ही में सदन के अंदर हो रहे व्यवहार पर चिंता जताते हुए सभी दलों से अपने सांसदों को अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी थी।
उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
LPG मुद्दे पर हो रहा था विरोध
बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्ष द्वारा LPG मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसके कारण कई दिनों तक प्रश्नकाल ठीक से नहीं चल सका।
हालांकि 16 मार्च को प्रश्नकाल फिर से सुचारु रूप से आयोजित किया गया।
निष्कर्ष: सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति से लोकसभा में निलंबित सांसदों की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही सदन की कार्यवाही को सुचारु और गरिमामय बनाए रखने के लिए सभी दलों ने अनुशासन का पालन करने का भरोसा दिया है।
