TET अनिवार्यता पर शिक्षकों का विरोध तेज: बोले—अनुभव की अनदेखी, आदेश वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

भोपाल। 09 अप्रैल 2026

भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों ने इस फैसले को उनके अनुभव और सम्मान के खिलाफ बताते हुए सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों तक पढ़ाने के बाद अब उनसे दोबारा परीक्षा देने को कहना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह उनके पेशेवर अनुभव पर सवाल खड़ा करता है। उनका तर्क है कि वर्षों की सेवा और कार्यक्षमता का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा से नहीं किया जा सकता।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षिका शीबा खान ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या किसी 25-26 साल के अनुभवी कलेक्टर से दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? अगर नहीं, तो फिर शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?” उन्होंने इसे पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य बताया।

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और उग्र आंदोलन की भी बात कही है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस आदेश से हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है। खासकर वे शिक्षक, जो वर्षों से नियमित सेवा में हैं, उनके लिए यह निर्णय असुरक्षा और अनिश्चितता पैदा कर रहा है।

वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य शिक्षण गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षकों के बीच संवाद जरूरी है, ताकि ऐसा समाधान निकाला जा सके जिससे गुणवत्ता भी बनी रहे और अनुभवी शिक्षकों का सम्मान भी कायम रहे।

फिलहाल, इस विवाद ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर देखने को मिल सकता है।