सड़कों की धूल साफ करने के लिए खर्च हुए ₹7000 करोड़, लोकसभा में सरकार ने दिया जवाब

नई दिल्ली | 5 फरवरी 2026

केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि देश के विभिन्न शहरों में वायु प्रदूषण (Air Pollution) को नियंत्रित करने, विशेषकर सड़कों की धूल से निपटने के लिए 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।

1. NCAP के तहत हुआ खर्च

यह धनराशि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को आवंटित की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य उन शहरों में प्रदूषण कम करना है जहाँ हवा की गुणवत्ता तय मानकों से खराब है।

2. पैसा कहाँ खर्च हुआ?

सड़कों की धूल (Road Dust) शहरी प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है। इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से इन कार्यों के लिए किया गया:

  • मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें: सड़कों की सफाई के लिए आधुनिक वैक्यूम क्लीनर जैसी मशीनों की खरीद।
  • वॉटर स्प्रिंकलर: धूल को उड़ने से रोकने के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव करने वाले टैंकर्स।
  • सड़कों का पक्का निर्माण: कच्ची सड़कों और फुटपाथों को पक्का करना ताकि धूल न उड़े।
  • ग्रीन बेल्ट: सड़कों के किनारे पेड़-पौधे लगाना।

3. कितने शहरों को मिला फायदा?

सरकार के मुताबिक, देश के 131 शहरों को इस अभियान के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इन शहरों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के साथ-साथ कई टियर-2 शहर भी शामिल हैं।

4. क्या जमीनी स्तर पर दिखा सुधार?

लोकसभा में उठे सवालों के जवाब में बताया गया कि इन प्रयासों के कारण कई शहरों के PM10 (धूल के कण) स्तर में कमी देखी गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मशीनें खरीदने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके नियमित उपयोग और कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा।