नसीरुद्दीन शाह का छलका दर्द

मुंबई | 5 फरवरी 2026

मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें मुंबई यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले ‘जश्न-ए-उर्दू’ कार्यक्रम में शामिल होने से अंतिम समय पर रोक दिया गया। इस घटना के बाद नसीर ने सत्ता और प्रशासन पर तीखे सवाल दागे हैं।

1. क्या है पूरा विवाद?

नसीरुद्दीन शाह को मुंबई यूनिवर्सिटी के एक सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता आमंत्रित किया गया था। लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें संदेश भेजा गया कि वे कार्यक्रम में न आएं।

  • नसीर का आरोप: अभिनेता का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन पर “ऊपर” से दबाव था कि उन्हें मंच न दिया जाए।
  • वजह: नसीर के मुताबिक, उनकी स्पष्टवादिता और सरकार की नीतियों पर उनकी आलोचनात्मक राय इस पाबंदी की मुख्य वजह हो सकती है।

2. नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा? (कड़वी बातें)

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नसीर ने एक इंटरव्यू में कहा:

“मैंने कभी सत्ता में बैठे लोगों की अंधी तारीफ नहीं की और न ही कभी जी-हजूरी की। शायद यही वजह है कि अब मुझे शिक्षण संस्थानों में बोलने से रोका जा रहा है। क्या अब अपनी राय रखना भी गुनाह हो गया है?”

उन्होंने आगे कहा कि कलाकारों और बुद्धिजीवियों की आवाज को दबाना एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

3. यूनिवर्सिटी और प्रशासन का पक्ष

दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी के कुछ सूत्रों और आयोजकों का कहना है कि:

  • सुरक्षा के कारण: कार्यक्रम में किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन या हंगामे की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
  • तकनीकी कारण: प्रशासन ने इसे केवल एक “लॉजिस्टिक मुद्दा” बताया है और किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से इनकार किया है।

4. सोशल मीडिया पर बंटी राय

नसीर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है:

  • समर्थक: कई लोग इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर हमला बता रहे हैं और नसीर का साथ दे रहे हैं।
  • विरोधी: कुछ यूजर्स का कहना है कि नसीर अक्सर विवादित बयान देते हैं, जिससे संस्थानों का माहौल खराब होता है।