तमिल सुपरस्टार और ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के अध्यक्ष थलापति विजय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। करूर में आयोजित एक विशाल राजनीतिक रैली के दौरान हुई भगदड़ और उसमें हुई मौतों के मामले में CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने विजय से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि जब रैली में अव्यवस्था फैली, तो उसे समय रहते रोका क्यों नहीं गया?
CBI की पूछताछ के 5 बड़े सवाल
जांच एजेंसी ने विजय और उनकी पार्टी के आयोजनकर्ताओं के सामने कुछ तीखे सवाल रखे हैं:
- भाषण क्यों नहीं रोका?: चश्मदीदों के मुताबिक, जब लोग गर्मी और भीड़ की वजह से बेहोश हो रहे थे, तब भी मंच से संबोधन जारी था। CBI ने पूछा- “क्या भीड़ को काबू करने के बजाय शक्ति प्रदर्शन को प्राथमिकता दी गई?”
- भीड़ का गलत अनुमान: क्या रैली के लिए जितनी अनुमति ली गई थी, उससे कहीं ज्यादा भीड़ बुलाई गई?
- सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: पुलिस के साथ हुए समझौते के अनुसार सुरक्षा घेरा (Barricading) क्यों नहीं बनाया गया?
- इमरजेंसी एग्जिट: भगदड़ के समय लोगों के निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते क्यों नहीं थे?
- मेडिकल सुविधाएं: क्या आयोजन स्थल पर एम्बुलेंस और डॉक्टरों की तैनाती नियमों के मुताबिक थी?
रैली की प्लानिंग और पुलिस का समझौता
CBI की जांच में यह बात सामने आई है कि आयोजन समिति और स्थानीय पुलिस के बीच हुए MOU (समझौता ज्ञापन) की शर्तों का उल्लंघन किया गया। शुरुआती जांच के मुताबिक:
- अनुमति 50,000 लोगों की थी, जबकि मौके पर करीब 1.5 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे।
- भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए तैनात किए गए निजी बाउंसरों के पास ऐसे आयोजनों का कोई अनुभव नहीं था।
“हम इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) थी।” – CBI सूत्र
