कर्नाटक के मूकाम्बिका वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी पर खतरा: प्रदूषण, अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज

29 अप्रैल 2026

कर्नाटक: Mookambika Wildlife Sanctuary को बचाने के लिए राज्यभर में एक बड़ा पर्यावरण अभियान तेजी से जोर पकड़ रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस संरक्षित क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह अभियान न केवल जंगल बल्कि इसके भीतर बहने वाली Sowparnika River को बचाने पर भी केंद्रित है।


तेजी से बढ़ रहा ‘Save Mookambika Sanctuary’ अभियान
कर्नाटक के कई हिस्सों से जुड़े पर्यावरण कार्यकर्ता इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। आम जनता की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जिससे यह आंदोलन राज्य स्तर पर एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

इस अभियान का उद्देश्य है:
• मूकाम्बिका वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी की सुरक्षा
• सोंपर्णिका नदी को प्रदूषण से बचाना
• अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना


डिजिटल तरीका बना अभियान की खास पहचान
इस आंदोलन की सबसे खास बात इसका आधुनिक तरीका है। कार्यकर्ता QR कोड के जरिए लोगों को जोड़ रहे हैं।

• लोग QR कोड स्कैन कर सकते हैं
• पर्यावरण को हो रहे नुकसान के बारे में जानकारी पा सकते हैं
• अभियान से जुड़कर कार्रवाई की मांग कर सकते हैं

यह तरीका दिखाता है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अब डिजिटल माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।


कौन-कौन से संगठन हैं शामिल
इस अभियान में कई प्रमुख पर्यावरण संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

• NECF
• Aranya
• Parisara Mathu Havamana Badalavane Sangha

ये संगठन जागरूकता फैलाने के साथ-साथ प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव भी बना रहे हैं।


मुख्य पर्यावरणीय समस्याएं क्या हैं?

अवैध व्यावसायिक गतिविधियां
• इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के भीतर होटल, दुकानें और अन्य व्यवसाय संचालित हो रहे हैं
• आरोप है कि ESZ लागू होने के बाद भी करीब 50 अनुमतियां दी गईं
• यह पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है


नदी में सीवेज से बढ़ता प्रदूषण
• बिना ट्रीटमेंट के सीवेज सीधे Sowparnika River में छोड़ा जा रहा है
• पानी दूषित और बदबूदार हो रहा है
• इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) पर खतरा बढ़ गया है


वन्यजीव आवास पर असर
• व्यावसायिक गतिविधियों से जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है
• वन्यजीवों के आवास प्रभावित हो रहे हैं
• सैंक्चुरी के भीतर इकोलॉजिकल डिग्रेडेशन तेजी से बढ़ रहा है


कानूनी उल्लंघन के आरोप
कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि इस मामले में कई महत्वपूर्ण पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन हो रहा है, जिनमें शामिल हैं:

• Wildlife (Protection) Act, 1972
• Eco-Sensitive Zone Notification 2017

इन नियमों के तहत संरक्षित क्षेत्रों में प्रदूषण और निर्माण गतिविधियों पर सख्त रोक होती है।


प्रशासन पर गंभीर आरोप
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन और ESZ मॉनिटरिंग कमेटी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

उनका कहना है कि:
• अवैध गतिविधियों को रोकने में असफलता रही
• पर्यावरण कानूनों को लागू नहीं किया गया
• निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल रहा

कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे “statutory authorities की पूरी विफलता” तक बताया है।


सरकार हरकत में, जांच के आदेश
मामले के बढ़ते दबाव के बीच कार्यकर्ताओं ने राज्य के वन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया।

इसके बाद:
• Principal Chief Conservator of Forests (PCCF) ने जांच के आदेश दिए
• स्थानीय वन विभाग को निर्देश दिए गए कि
– आरोपों की जांच करें
– विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें


क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर
Western Ghats का हिस्सा होने के कारण मूकाम्बिका सैंक्चुरी जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

यहां बढ़ता प्रदूषण और अवैध गतिविधियां:
• दुर्लभ प्रजातियों के लिए खतरा हैं
• पूरे इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती हैं

यह मामला एक बड़े मुद्दे को भी उजागर करता है:
👉 पर्यटन और व्यावसायिक विकास के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी


निष्कर्ष
कर्नाटक की Mookambika Wildlife Sanctuary में बढ़ते प्रदूषण और अवैध गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण की गंभीर चुनौतियों को सामने ला दिया है।

एक ओर जहां नागरिक और संगठन मिलकर सैंक्चुरी को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के प्रभावी पालन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

👉 साफ है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकता है।