लिंकन, न्यूजीलैंड, 26 अक्टूबर 2026। भारत-ए और न्यूजीलैंड-ए के बीच खेले जा रहे पहले अनौपचारिक टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने क्रिकेट प्रशंसकों के बीच अंपायरिंग को लेकर चर्चा छेड़ दी। शानदार बल्लेबाजी कर रहे पडिक्कल 199 रन के निजी स्कोर पर आउट करार दिए गए। वह अपने दोहरे शतक से केवल एक रन दूर थे। अंपायर के फैसले पर उन्होंने हैरानी जताई और कुछ देर तक क्रीज पर खड़े रहे।
199 रन पर आउट होने का फैसला बना चर्चा का विषय
मैच के तीसरे दिन न्यूजीलैंड-ए के तेज गेंदबाज जैक गिब्सन गेंदबाजी कर रहे थे। उनकी गेंद लेग स्टंप के बाहर की तरफ गई। पडिक्कल ने उसे फ्लिक करने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके बल्ले से दूर निकलती दिखाई दी और पैड से लगकर विकेटकीपर मिचेल हे के दस्तानों में पहुंच गई।
न्यूजीलैंड-ए के खिलाड़ियों ने कैच आउट की अपील की और मैदानी अंपायर ने पडिक्कल को आउट करार दे दिया। इस फैसले से भारतीय बल्लेबाज हैरान नजर आए। उन्होंने अंपायर की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और यह बताने की कोशिश की कि गेंद उनके बल्ले से दूर थी।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इसे आधिकारिक तौर पर गलत फैसला घोषित नहीं किया जा सकता। लेकिन गेंद के बल्ले से संपर्क और आउट दिए जाने की परिस्थितियों ने फैसले पर सवाल जरूर खड़े किए।
248 गेंदों पर 199 रन, 24 चौके और 3 छक्के
देवदत्त पडिक्कल ने अपनी पारी में शानदार धैर्य और तकनीक का प्रदर्शन किया। उन्होंने 248 गेंदों का सामना करते हुए 199 रन बनाए। उनकी पारी में 24 चौके और तीन छक्के शामिल रहे।
पडिक्कल ने इस दौरान अपना 12वां प्रथम श्रेणी शतक पूरा किया। भारत-ए के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह उनका तीसरा शतक था। वह टीम के लिए 1,000 से अधिक प्रथम श्रेणी रन बनाने का आंकड़ा भी पार कर चुके हैं।
उनकी यह पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि भारत-ए पहली पारी में केवल 113 रन पर सिमट गई थी। ऐसे मुश्किल समय में पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को मुकाबले में वापसी का मौका दिया।
साई सुदर्शन के साथ निभाई 215 रन की साझेदारी
भारत-ए की दूसरी पारी में शुरुआत एक बार फिर खराब रही। यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल जल्दी आउट हो गए, जिससे टीम शुरुआती ओवरों में ही दबाव में आ गई।
इसके बाद पडिक्कल और साई सुदर्शन ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 215 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई। सुदर्शन ने 92 रन बनाए, जबकि पडिक्कल ने दूसरे छोर पर टिककर रन बनाना जारी रखा।
इस साझेदारी ने भारत-ए को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान 150 रन का आंकड़ा भी पार किया और भारत-ए के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रथम श्रेणी स्कोर दर्ज किया।
पहली पारी में न्यूजीलैंड-ए ने बनाई थी बड़ी बढ़त
मुकाबले में भारत-ए की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। पहली पारी में टीम 113 रन ही बना सकी। इसके जवाब में न्यूजीलैंड-ए ने 317 रन बनाए और 204 रन की बढ़त हासिल की।
ऐसे में भारत-ए को दूसरी पारी में मजबूत बल्लेबाजी की जरूरत थी। शुरुआती विकेट गिरने के बाद पडिक्कल और सुदर्शन की साझेदारी ने टीम को संभाला। पडिक्कल के 199 रन पर आउट होने के बावजूद उनकी पारी ने भारत-ए की वापसी में अहम भूमिका निभाई। <Cite refs={[“turn679899news15″,”turn679899search3”]}/>
क्या DRS होता तो फैसला बदल सकता था?
पडिक्कल के आउट होने के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्णय समीक्षा प्रणाली (DRS) उपलब्ध होती, तो क्या फैसले की दोबारा जांच हो सकती थी।
हालांकि, किसी फैसले का परिणाम DRS से क्या होता, यह वीडियो और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के बिना निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। अनौपचारिक टेस्ट मैचों में उपलब्ध समीक्षा सुविधाएं भी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों से अलग हो सकती हैं। इसलिए यह कहना कि DRS होने पर पडिक्कल निश्चित रूप से नॉट आउट दिए जाते, केवल अनुमान होगा।
फिलहाल, चर्चा का केंद्र उनका आउट होने का तरीका और दोहरे शतक से महज एक रन दूर रह जाना है।
पडिक्कल के लिए निराशाजनक अंत, लेकिन पारी यादगार
199 रन पर आउट होना किसी भी बल्लेबाज के लिए निराशाजनक हो सकता है, खासकर तब जब वह दोहरे शतक के करीब हो। पडिक्कल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। पवेलियन लौटते समय वह फैसले से नाखुश दिखाई दिए। यश राठौड़ ने भी उनके प्रयास की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया।
भले ही पडिक्कल दोहरा शतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन 199 रन की उनकी पारी ने साबित किया कि वह दबाव की स्थिति में लंबी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं। अब अंपायर के फैसले पर चर्चा के साथ-साथ उनकी इस शानदार बल्लेबाजी को भी याद किया जा रहा है।
