धरती के वन्यजीवों पर बढ़ा संकट, 52 साल में निगरानी वाली आबादियों का औसत आकार 73% घटा

नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026

दुनियाभर में वन्यजीवों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) की नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। 7 अक्टूबर 2026 को जारी लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, वर्ष 1970 से 2022 के बीच निगरानी में शामिल वन्यजीव आबादियों के औसत आकार में 73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट में स्तनधारी जीवों, पक्षियों, मछलियों, सरीसृपों और उभयचरों की आबादियों में आए बदलावों का अध्ययन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक आवासों का विनाश, जंगलों का क्षरण, अत्यधिक शिकार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन वन्यजीवों के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन पर दबाव बना रहेगा।

क्या है 73 प्रतिशत गिरावट का मतलब?

रिपोर्ट में सामने आया 73 प्रतिशत का आंकड़ा यह नहीं बताता कि दुनिया के कुल 73 प्रतिशत जंगली जानवर खत्म हो गए हैं। यह 1970 से 2022 के बीच निगरानी की गई वन्यजीव आबादियों के औसत आकार में आए बदलाव को दर्शाता है।

इस अध्ययन में 5,790 कशेरुकी प्रजातियों की 35,803 आबादियों के रुझानों का विश्लेषण किया गया। इनमें वे आबादियां भी शामिल हैं, जिनकी संख्या में वृद्धि हुई, जो स्थिर रहीं या जिनमें गिरावट दर्ज की गई।

मीठे पानी के जीवों पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट में अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों में वन्यजीव आबादियों के औसत आकार में गिरावट दर्ज की गई है। मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्रों में सबसे अधिक 85 प्रतिशत गिरावट सामने आई। स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में यह गिरावट 69 प्रतिशत और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में 59 प्रतिशत रही।

नदियों और झीलों में प्रदूषण, प्राकृतिक जल प्रवाह में बदलाव और आवासों का नुकसान मीठे पानी में रहने वाले जीवों के लिए गंभीर खतरे हैं। इनका प्रभाव केवल जलीय जीवों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र और उस पर निर्भर समुदायों को प्रभावित कर सकता है।

लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में स्थिति ज्यादा गंभीर

क्षेत्रवार आंकड़ों में लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में निगरानी वाली वन्यजीव आबादियों के औसत आकार में 95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अफ्रीका में यह गिरावट 80 प्रतिशत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 49 प्रतिशत रही। उत्तरी अमेरिका में 28 प्रतिशत, जबकि यूरोप और मध्य एशिया में 23 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जैव विविधता पर संकट अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, क्षेत्रवार तुलना करते समय निगरानी की अवधि और उपलब्ध आंकड़ों के अंतर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

वन्यजीवों की संख्या घटने के पीछे क्या हैं कारण?

रिपोर्ट में प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना और उनका क्षरण वन्यजीव आबादियों के लिए सबसे प्रमुख खतरों में शामिल हैं। कृषि विस्तार, जंगलों की कटाई और निर्माण गतिविधियों से जीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं। इसके अलावा अत्यधिक शिकार, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आक्रामक बाहरी प्रजातियां और बीमारियां भी वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा करती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन उत्पादन और उपभोग के मौजूदा तरीकों में बदलाव, प्राकृतिक संसाधनों का टिकाऊ इस्तेमाल और पर्यावरण के अनुकूल निवेश जैव विविधता को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

भारत में संरक्षण प्रयासों से उम्मीद

वैश्विक स्तर पर गिरावट के बावजूद रिपोर्ट में कुछ वन्यजीव आबादियों में सुधार को उम्मीद की किरण बताया गया है। बाघों, हरे समुद्री कछुओं, ब्लूफिन टूना और दक्षिणी अफ्रीका के हाथियों की कुछ आबादियों में सुधार संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को दिखाता है।

भारत में बाघ, एक सींग वाले गैंडे और गंगा नदी की डॉल्फिन के संरक्षण प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, किसी एक प्रजाति की आबादी में सुधार से यह नहीं माना जा सकता कि सभी वन्यजीव सुरक्षित हैं। इसके लिए जंगलों, नदियों, आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक गलियारों की सुरक्षा भी आवश्यक है।

संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी में शामिल लगभग आधी वन्यजीव आबादियां स्थिर थीं या उनमें वृद्धि दर्ज की गई। करीब 7 प्रतिशत आबादियां स्थिर रहीं, जबकि 43 प्रतिशत में वृद्धि हुई। इसके बावजूद घटती आबादियों में गिरावट का स्तर अधिक होने के कारण वैश्विक औसत नकारात्मक बना रहा।

रिपोर्ट में प्रकृति संरक्षण के लिए सरकारों, उद्योगों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। प्राकृतिक आवासों की रक्षा, प्रदूषण पर नियंत्रण, टिकाऊ कृषि और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे कदम वन्यजीवों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माने गए हैं।

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