मुंबई/नागपुर | 9 अक्टूबर 2026
दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र के कई शहरों में पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। मुंबई, ठाणे, नागपुर और पुणे में कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस उनसे दिल्ली जाने की योजना पूछ रही है और प्रदर्शन में शामिल नहीं होने संबंधी लिखित बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कह रही है। कुछ लोगों ने पुलिस पर उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश का आरोप भी लगाया है।
यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े छात्र संगठनों की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुलाया गया है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या को रोकना है। महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि की, लेकिन राज्य में हिरासत में लिए जाने की कुछ शिकायतों से इनकार किया है।
लोगों से क्या लिखवाया जा रहा है?
नागपुर जिले के कुछ कार्यकर्ताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है। एक नोटिस में कार्यकर्ता से पूछा गया कि वह दिल्ली कब, किस साधन से और किन लोगों के साथ जाएगा।
एक अन्य नोटिस में कार्यकर्ता को 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में शामिल होने से दूर रहने की सलाह दी गई। उसे पुलिस थाने में उपस्थित होकर लिखित बॉन्ड देने के लिए भी कहा गया कि वह प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा और सार्वजनिक शांति भंग नहीं करेगा। नोटिस में संभावित हिंसा, सड़क अवरोध और सरकारी कामकाज में बाधा की आशंका का उल्लेख किया गया था।
मुंबई और ठाणे में भी पूछताछ के आरोप
मुंबई के सांताक्रूज क्षेत्र की एक महिला कार्यकर्ता ने दावा किया कि पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और 10 अक्टूबर की योजना के बारे में पूछताछ की। उसके अनुसार, उसे पुलिस स्टेशन बुलाकर ऐसा दस्तावेज हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की बात थी।
ठाणे के एक छात्र संगठन के सदस्य ने भी पुलिस अधिकारियों की ओर से यात्रा संबंधी फोन आने की बात कही। नागपुर में कुछ कार्यकर्ताओं ने रेलवे सुरक्षा कर्मियों की ओर से दिल्ली जाने वाले लोगों की जानकारी पूछे जाने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये संबंधित व्यक्तियों के आरोप हैं। सभी घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ मामलों में नोटिस दिए गए थे, लेकिन मुख्यालय की ओर से व्यापक हिरासत के निर्देश नहीं दिए गए थे।
पुलिस किस कानून का हवाला दे रही है?
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 168 का हवाला दिया है। यह प्रावधान संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस को निवारक कदम उठाने की शक्ति देता है। धारा 170(1) कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए निवारक गिरफ्तारी से संबंधित है।
हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस देना, उससे बॉन्ड मांगना और उसे गिरफ्तार करना अलग-अलग कानूनी कदम हैं। किसी भी कार्रवाई की वैधता उसके तथ्यों, परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी। केवल नोटिस जारी होने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि संबंधित व्यक्ति ने कोई अपराध किया है।
दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों और कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला दिया है। प्रदर्शन के आयोजकों ने इसके बावजूद आंदोलन की योजना जारी रखने की बात कही है।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई जा रही है। पुलिस ने राजधानी के प्रवेश मार्गों, रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी तेज करने की तैयारी की है। अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी भीड़ जुटने या प्रतिबंधों का उल्लंघन होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बल और अस्थायी हिरासत केंद्र तैयार किए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारी क्या कह रहे हैं?
CJP से जुड़े कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोकने और प्रदर्शन में भागीदारी सीमित करने की कोशिश है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी कार्यकर्ताओं को नोटिस दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, पुलिस का पक्ष है कि संभावित हिंसा, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए निवारक कदम उठाए जा रहे हैं। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच संबंधित नोटिसों की कानूनी स्थिति और वास्तविक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
10 अक्टूबर को क्या होगा?
प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आयोजकों ने आंदोलन की योजना छोड़े जाने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में दिल्ली और महाराष्ट्र, दोनों जगह पुलिस की निगरानी जारी रहने की संभावना है।
इस मामले में अहम सवाल यह है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की निवारक शक्तियों का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा रखने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। इसका आकलन संबंधित कानूनी आदेशों और मामले के तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
