NSA के इस्तेमाल पर हाई कोर्ट सख्त, दो भाइयों की हिरासत रद्द; अधिकारियों की जल्दबाजी पर उठाए सवाल

जबलपुर, मध्य प्रदेश | 9 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के कथित मनमाने और लापरवाहीपूर्ण इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल किए जाने वाले इस कानून को जिस तरह सामान्य प्रक्रिया की तरह लागू किया जा रहा है, उससे इसकी गंभीरता प्रभावित हो रही है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जबलपुर के दो भाइयों की निवारक हिरासत के आदेश को रद्द करते हुए उनकी रिहाई का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जबलपुर निवासी राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और उनके भाई राजेश ठाकुर की हिरासत से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने जनवरी 2026 में दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। प्रशासन की ओर से सार्वजनिक शांति के लिए खतरा होने का आधार बताया गया था।

दोनों भाइयों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर हिरासत के आदेश को चुनौती दी। उनका पक्ष था कि प्रशासन ने उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को सही तरीके से नहीं देखा और हिरासत का निर्णय उचित तथ्यों के आधार पर नहीं लिया गया।

11 मामलों में बरी होने के बावजूद रिकॉर्ड पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित आपराधिक मामलों में से 11 में आरोपितों को पहले ही बरी किया जा चुका था, लेकिन उन मामलों को हिरासत के आधार में लंबित या अन्य प्रतिकूल स्थिति के रूप में दर्शाया गया था।

अदालत ने रिकॉर्ड में इस तरह की त्रुटियों को गंभीर माना। निवारक हिरासत जैसे कठोर कदम के लिए अधिकारियों को सही, प्रासंगिक और अद्यतन तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना जरूरी है। पुराने मामलों या गलत आपराधिक विवरण के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित करना कानूनी सवाल खड़े करता है।

एक ही दिन में पूरी हुई कार्रवाई पर भी सवाल

हाई कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पुलिस अधिकारियों के प्रस्ताव से लेकर जिला प्रशासन के हिरासत आदेश तक की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी कर दी गई थी।

अदालत की चिंता यह थी कि इतने कम समय में प्रस्तुत तथ्यों की उचित जांच और स्वतंत्र विचार हुआ या नहीं। अदालत ने मामले में अधिकारियों द्वारा आवश्यक तथ्यों पर पर्याप्त ध्यान न देने को हिरासत आदेश की वैधता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना।

NSA कोई सामान्य आपराधिक कानून नहीं

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने की शक्ति दी गई है। इसका उद्देश्य निर्धारित कानूनी शर्तों के तहत संभावित गंभीर खतरों को रोकना है। यह सामान्य आपराधिक मुकदमे से अलग व्यवस्था है, क्योंकि इसमें व्यक्ति को अपराध साबित होने के बाद सजा देने के बजाय संभावित खतरे के आधार पर हिरासत में रखा जा सकता है।

इसी वजह से इस कानून का इस्तेमाल करते समय कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 समानता तथा जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़े हैं। हिरासत के मामलों में अधिकारियों को कानून के अनुरूप और तथ्यों की जांच के बाद निर्णय लेना होता है।

अदालत के फैसले का क्या है महत्व?

इस मामले में हाई कोर्ट ने दोनों भाइयों के खिलाफ हिरासत आदेश को निरस्त कर दिया। फैसले का प्रमुख संदेश यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी कठोर कानून का इस्तेमाल करते समय केवल पुराने रिकॉर्ड या अप्रमाणित विवरण पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

निवारक हिरासत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीधे प्रभावित होती है। इसलिए रिकॉर्ड की शुद्धता, तथ्यों की प्रासंगिकता और सक्षम अधिकारी द्वारा स्वतंत्र विचार करना आवश्यक है। अदालत की टिप्पणी प्रशासन को यह याद दिलाती है कि कानून में मिली असाधारण शक्ति का इस्तेमाल भी निर्धारित सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *