अभिजीत नहीं, इस समय करें द्वादशी और मघा श्राद्ध; जानें सही मुहूर्त और धार्मिक महत्व

7 अक्टूबर 2026 | धर्म डेस्क: पितृ पक्ष में आज का दिन विशेष माना जा रहा है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ मघा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसी वजह से आज द्वादशी श्राद्ध और मघा श्राद्ध दोनों किए जाएंगे। पंचांग के अनुसार आज द्वादशी तिथि रात करीब 11:16 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी शुरू होगी, जबकि मघा नक्षत्र रात करीब 9:40 बजे तक रहेगा।

ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आज श्राद्ध अभिजीत मुहूर्त में करना चाहिए या किसी दूसरे समय? धार्मिक परंपरा में श्राद्ध कर्म के लिए सामान्य शुभ मुहूर्त से अधिक महत्व कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का माना जाता है।

आज द्वादशी और मघा श्राद्ध एक ही दिन

7 अक्टूबर को दो महत्वपूर्ण श्राद्ध एक साथ पड़ रहे हैं। पंचांग के अनुसार आज द्वादशी श्राद्ध और मघा श्राद्ध दोनों का पालन किया जाएगा।

द्वादशी श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई थी। कुछ परंपराओं में यह दिन संन्यास ग्रहण कर चुके पूर्वजों के श्राद्ध के लिए भी विशेष माना जाता है।

वहीं, मघा श्राद्ध का संबंध मघा नक्षत्र से है। धार्मिक मान्यताओं में मघा नक्षत्र को पितरों से जुड़ा हुआ माना जाता है।

अभिजीत मुहूर्त में नहीं, श्राद्ध के लिए ये समय महत्वपूर्ण

आज के पंचांग में अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं बताया गया है। इसलिए श्राद्ध कर्म के लिए इसे लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।

श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष काल को प्राथमिकता दी जाती है। दिल्ली की पंचांग गणना के अनुसार आज:

  • कुतुप मुहूर्त: लगभग 11:52 AM से 12:40 PM
  • रौहिण मुहूर्त: लगभग 12:40 PM से 1:28 PM
  • अपराह्न काल: लगभग 1:28 PM से 3:51 PM

इन समयों में श्राद्ध कर्म करना पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि शहर के अनुसार सूर्योदय और स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

मघा श्राद्ध के लिए भी दोपहर का समय महत्वपूर्ण

मघा श्राद्ध भी आज ही किया जाएगा। मघा नक्षत्र रात तक रहने के कारण आज मघा श्राद्ध का संयोग बन रहा है। श्राद्ध कर्म के लिए दिन के मध्य और अपराह्न काल को महत्व दिया जाता है।

इसलिए अगर परिवार में आज मघा श्राद्ध किया जाना है, तो सुबह के सामान्य शुभ मुहूर्त के बजाय मध्याह्न से अपराह्न के श्राद्ध काल को प्राथमिकता देना परंपरानुसार उचित माना जाता है।

किसका श्राद्ध आज किया जाता है?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यदि किसी पूर्वज की मृत्यु द्वादशी तिथि को हुई थी, तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि पर किया जाता है।

वहीं मघा श्राद्ध में मघा नक्षत्र के आधार पर श्राद्ध कर्म किया जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसकी परंपराओं में अंतर हो सकता है।

इसलिए केवल कैलेंडर की तारीख देखकर श्राद्ध करने के बजाय परिवार की परंपरा और पूर्वज की मृत्यु तिथि/नक्षत्र को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्राद्ध में क्या किया जाता है?

श्राद्ध कर्म की पारंपरिक विधि में पितरों का स्मरण, तर्पण, पिंडदान और भोजन आदि शामिल हो सकते हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार ब्राह्मण भोजन, दान और अन्य धार्मिक कर्म भी किए जाते हैं।

श्राद्ध की विधि क्षेत्र, कुल-परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष परिस्थिति में स्थानीय पुरोहित या परिवार की परंपरा के अनुसार विधि अपनाना उचित माना जाता है।

अगर मृत्यु की तिथि पता नहीं हो तो?

यदि किसी पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि ज्ञात नहीं है, तो पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी और इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।

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