बुनिया/किन्शासा, 29 सितंबर 2026।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 26 सितंबर तक देश में इबोला के 8,067 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 3,901 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी संक्रमित लोगों में मृत्यु दर 48 फीसदी से अधिक है। यह प्रकोप अब देश के 26 में से 7 प्रांतों के 63 हेल्थ जोन तक फैल चुका है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कई क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन पूरे देश में बीमारी के प्रसार पर अभी नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। खासतौर पर उत्तर किवु समेत कुछ इलाकों में मामलों में तेजी ने चिंता बढ़ा दी है।
मई में घोषित हुआ था नया प्रकोप
कांगो ने 15 मई 2026 को इबोला के नए प्रकोप की घोषणा की थी। इस बार संक्रमण Bundibugyo प्रजाति के इबोला वायरस से जुड़ा है। WHO ने मई में इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति (PHEIC) के रूप में निर्धारित किया था।
WHO के 25 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, 23 सितंबर तक 7,890 पुष्ट मामले और 3,799 मौतें दर्ज की गई थीं। इसके बाद कुछ ही दिनों में आंकड़े 8,000 के पार पहुंच गए।
स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी
महामारी से लड़ने में सबसे बड़ी अड़चनों में से एक स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बन गई है। WHO के अनुसार इबोला उपचार केंद्रों में मरीजों के लिए बेड बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, स्वच्छता कर्मी और अन्य स्टाफ उपलब्ध नहीं हैं।
एक इबोला उपचार केंद्र को पूरी तरह संचालित करने के लिए करीब 300 स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत पड़ सकती है। कई कर्मचारियों को वेतन में देरी या आंशिक भुगतान की समस्या का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण कुछ इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल ने भी महामारी की रोकथाम को प्रभावित किया।
कुछ इलाकों में मामले घटे, लेकिन संक्रमण खत्म नहीं हुआ
WHO के मुताबिक इटुरी और हॉट-यूले जैसे कुछ प्रांतों में मामलों में गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद उत्तर किवु और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण की तस्वीर अलग है। WHO ने कहा है कि अलग-अलग क्षेत्रों में संक्रमण का स्तर काफी अलग है और राष्ट्रीय आंकड़ों में यह अंतर पूरी तरह दिखाई नहीं देता।
मौजूदा प्रकोप 63 हेल्थ जोन और सात प्रांतों तक पहुंच चुका है—बास-यूले, हॉट-यूले, इटुरी, उत्तर किवु, दक्षिण किवु, सुद-उबांगी और त्शोपो। इससे पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का जोखिम भी बढ़ा है।
समुदायों में समय पर इलाज मिलना बड़ी चुनौती
इबोला के मामले में समय पर पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। WHO ने चेतावनी दी है कि प्रभावित इलाकों में मरीजों की पहचान और उन्हें शुरुआती उपचार उपलब्ध कराने में देरी हो रही है। समुदायों में होने वाली मौतों का लगातार ऊंचा स्तर इस समस्या की गंभीरता को दिखाता है।
इसके अलावा असुरक्षा, लोगों का विस्थापन, बड़ी संख्या में लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान जाना और कुछ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की मुश्किलें संक्रमण को नियंत्रित करने की कोशिशों को जटिल बना रही हैं।
बच्चों में मृत्यु दर भी चिंता का कारण
WHO के अनुसार इस प्रकोप में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 60 फीसदी से ज्यादा बताई गई है, जबकि वयस्कों में यह करीब 40 फीसदी है। छोटे बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है, जिससे समय पर इलाज शुरू करने में देरी का खतरा रहता है।
वैक्सीन और इलाज को लेकर क्या स्थिति है?
Bundibugyo वायरस के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस स्ट्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए विशेष रूप से स्वीकृत उपचार या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। कांगो ने अगस्त के अंत में Ervebo वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसे मूल रूप से Zaire स्ट्रेन के लिए विकसित किया गया था। Bundibugyo के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता को लेकर अभी शोध और निगरानी जारी है।
क्यों गंभीर है यह प्रकोप?
ताजा आंकड़ों के आधार पर मौजूदा प्रकोप कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है, जिसने 2018–2020 के कांगो प्रकोप को पीछे छोड़ दिया है। वैश्विक स्तर पर 2014–2016 का पश्चिम अफ्रीकी इबोला प्रकोप इससे कहीं बड़ा था, जिसमें 28,000 से अधिक संक्रमण और 11,000 से ज्यादा मौतें दर्ज हुई थीं।
