नई दिल्ली | 19 सितंबर 2026
भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप जरूर किया, लेकिन सीरीज के आखिरी मुकाबले ने भारतीय बल्लेबाजी से जुड़ा एक सवाल भी छोड़ दिया। 17 सितंबर को नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन ने शुरुआत में ऐसा तूफान मचाया कि भारत एक समय बेहद बड़े स्कोर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था।
अभिषेक ने महज 30 गेंदों में रिकॉर्ड टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा और 34 गेंदों में 108 रन बनाए। संजू सैमसन ने भी 35 गेंदों पर 50 रन की पारी खेली। दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 142 रन की साझेदारी की। लेकिन अभिषेक के आउट होने के बाद भारतीय पारी की रफ्तार अचानक कम हो गई।
भारत ने आखिरकार 20 ओवर में 221/7 का स्कोर बनाया। इसके बाद गेंदबाजों ने अफगानिस्तान को महज 94 रन पर समेट दिया और भारत ने मुकाबला 127 रन से जीत लिया।
10 ओवर में 142 रन, फिर अचानक बदल गया मैच का रुख
भारतीय पारी की शुरुआत देखकर ऐसा लग रहा था कि टीम टी20 क्रिकेट में अपने सबसे बड़े स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
अभिषेक शर्मा ने शुरुआत से ही अफगान गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। उन्होंने सिर्फ 16 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और फिर अगले 14 गेंदों में अपना शतक पूरा कर दिया। उनका 30 गेंदों का शतक भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज शतक बना।
संजू सैमसन ने भी उनका भरपूर साथ दिया। दोनों की विस्फोटक बल्लेबाजी के कारण भारत ने लगभग 10 ओवर में 142 रन बना लिए थे।
लेकिन इसी स्कोर पर अभिषेक शर्मा राशिद खान के हाथों कैच आउट हो गए। इसके बाद भारतीय बल्लेबाजी की गति वैसी नहीं रही जैसी शुरुआती 10 ओवरों में दिखाई दी थी।
अभिषेक के आउट होते ही विकेटों का सिलसिला
अभिषेक के आउट होने के बाद तिलक वर्मा क्रीज पर आए, लेकिन वह सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए।
इसके बाद संजू सैमसन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, लेकिन 35 गेंदों पर 50 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उस समय भारत का स्कोर 164/3 था।
इसके बाद सीरीज में अपना पहला मुकाबला खेल रहे शिवम दुबे 14 रन बनाकर आउट हुए। वह 15.3 ओवर में 186/4 के स्कोर पर आउट हुए। इसके बाद ईशान किशन 10 रन बनाकर रन आउट हो गए, जबकि नीतीश कुमार रेड्डी सिर्फ 1 रन बना सके। कप्तान श्रेयस अय्यर ने 20 गेंदों पर 29 रन बनाए, लेकिन वह भी रन आउट हो गए।
आखिरी 5 ओवर में सिर्फ 37 रन
यही भारतीय पारी का सबसे बड़ा सवाल बना।
15 ओवर पूरे होने के बाद भारत का स्कोर 184/3 था। उस समय भारत के पास पांच पूरे ओवर बाकी थे और क्रीज पर पर्याप्त बल्लेबाजी मौजूद थी।
लेकिन अंतिम पांच ओवरों में भारत सिर्फ 37 रन जोड़ सका और सात विकेट पर 221 रन तक पहुंचा।
अगर शुरुआती 10 ओवर की गति और 15 ओवर तक बने स्कोर को देखा जाए तो भारत के लिए 250 से ज्यादा, यहां तक कि 300 के आसपास पहुंचने की संभावना दिखाई दे रही थी। हालांकि यह एक अनुमानित संभावित स्कोर था, वास्तविक पारी में अफगान गेंदबाजों ने वापसी की और भारतीय बल्लेबाज उस रफ्तार को कायम नहीं रख सके।
300 रन का मौका क्यों माना जा रहा है खास?
भारतीय पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर 297/6 है, जो उसने 12 अक्टूबर 2024 को बांग्लादेश के खिलाफ हैदराबाद में बनाया था।
अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 में जिस तरह भारत ने शुरुआत की थी, उससे उस रिकॉर्ड के करीब पहुंचने की उम्मीद पैदा हो गई थी। लेकिन बीच के ओवरों में विकेट गिरने और आखिरी ओवरों में रन गति कम होने के कारण भारत 221 तक ही पहुंच पाया।
यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 300 रन बनना निश्चित नहीं था। टी20 क्रिकेट में विकेट, गेंदबाजी में बदलाव और मैच की परिस्थितियां तेजी से समीकरण बदल देती हैं। इसलिए 300 का आंकड़ा एक संभावित मौका था, पक्का स्कोर नहीं।
अभिषेक और संजू ने दी शानदार शुरुआत
मध्यक्रम पर सवाल उठने के बावजूद भारत की शुरुआती बल्लेबाजी इस मैच की सबसे बड़ी सकारात्मक बात रही।
अभिषेक शर्मा ने 108 रन की विस्फोटक पारी में 11 छक्के लगाए। उन्होंने सिर्फ 30 गेंदों में शतक पूरा कर भारतीय क्रिकेट में नया रिकॉर्ड बनाया। ICC के मुताबिक उनका यह शतक पूर्ण सदस्य देशों के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे तेज शतक था।
दूसरी तरफ संजू सैमसन ने 35 गेंदों पर 50 रन बनाकर अपने शानदार फॉर्म को आगे बढ़ाया। दोनों ने मिलकर भारत को ऐसी शुरुआत दी जिससे बड़े स्कोर की उम्मीद पैदा हुई।
इस सीरीज में पहली बार भारत ने पहले बल्लेबाजी की
इस कमजोरी को समझने के लिए पूरी सीरीज का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है।
पहले दोनों मुकाबलों में भारत ने लक्ष्य का पीछा किया था। पहले टी20 में अफगानिस्तान ने 156/8 बनाए और भारत ने 13.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। दूसरे मैच में अफगानिस्तान ने 159/8 बनाए और भारत ने 14.5 ओवर में 163/3 बनाकर मैच जीत लिया।
तीसरे मुकाबले में भारत को पहली बार पहले बल्लेबाजी करनी पड़ी। इसी मैच में बल्लेबाजी इकाई की पूरी तस्वीर सामने आई और शुरुआती विस्फोट के बाद मध्यक्रम की गति पर सवाल उठा।
गेंदबाजों ने बल्लेबाजी की कमी की भरपाई कर दी
अगर भारतीय बल्लेबाज आखिरी ओवरों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखा पाए, तो गेंदबाजों ने इसकी भरपाई पूरी तरह कर दी।
222 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान की टीम 14.1 ओवर में 94 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से रवि बिश्नोई और नीतीश कुमार रेड्डी ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि अक्षर पटेल ने दो विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और यश ठाकुर को भी एक-एक विकेट मिला।
भारत ने मुकाबला 127 रन से जीत लिया।
सीरीज 3-0, लेकिन बल्लेबाजी पर काम की जरूरत
तीन मैचों की सीरीज में भारत का प्रदर्शन कुल मिलाकर प्रभावशाली रहा और टीम ने तीनों मुकाबले जीते। अभिषेक शर्मा ने सीरीज में लगातार आक्रामक बल्लेबाजी की और तीसरे मैच में तो उन्होंने रिकॉर्ड ही बना दिया।
लेकिन तीसरे मैच ने यह भी दिखाया कि अगर शुरुआती साझेदारी टूटती है तो मध्यक्रम को पारी की गति बनाए रखने की जरूरत होगी।
अफगानिस्तान के खिलाफ भारत को इस कमजोरी की बड़ी कीमत नहीं चुकानी पड़ी, क्योंकि 221 रन के स्कोर का बचाव भारतीय गेंदबाजों ने आसानी से कर लिया। मगर आने वाली मजबूत टीमों के खिलाफ ऐसी स्थिति में बड़े लक्ष्य को अंतिम ओवरों तक तेजी से ले जाना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कप्तान और कोच ने भी अभिषेक की पारी को सराहा
सीरीज जीतने के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने अभिषेक की पारी की तारीफ की और माना कि उनकी बल्लेबाजी ने भारत को 220 रन के आसपास पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी अभिषेक की पारी से आगे पावरप्ले में 100 रन बनाने को खास उपलब्धि बताया। यह भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में पावरप्ले के दौरान 100 रन का पहला आंकड़ा था।
इससे साफ है कि टीम की आक्रामक बल्लेबाजी की रणनीति को आगे भी जारी रखने पर जोर है।
आगे के लिए क्या संकेत मिला?
अफगानिस्तान के खिलाफ 3-0 की जीत भारतीय टीम के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आई, लेकिन तीसरे मैच का स्कोरकार्ड बल्लेबाजी इकाई के लिए एक उपयोगी संकेत भी छोड़ गया।
पावरप्ले में 100 रन और 10 ओवर में 142 रन जैसी शुरुआत के बाद 221/7 तक पहुंचना बताता है कि शुरुआत और फिनिश के बीच बड़ा अंतर रहा। आखिरी पांच ओवर में सिर्फ 37 रन इसका सबसे स्पष्ट आंकड़ा है।
भारत के लिए अच्छी बात यह रही कि गेंदबाजी इकाई ने विपक्षी टीम को 100 रन के अंदर समेट दिया। इसलिए यह कमी मैच के नतीजे पर भारी नहीं पड़ी।
